अयोध्या। फर्जी जमानत दाखिल करने के मामले में आरोपी बनाए गए जय पाल सिंह की अग्रिम जमानत अर्जी कोर्ट ने निरस्त कर दी। यह आदेश अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय दीपक यादव की अदालत से सोमवार को पारित हुआ है। बदायूं निवासी आरोपी जय पाल सिंह ने अदालत में अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल करते हुए कहा कि दर्ज प्राथमिकी में घटना का समय व तिथि अंकित नहीं है। वादी मुकदमा श्याम नारायण शुक्ला वर्तमान में प्रधान भी नहीं है। अपने को बेकसूर व सम्मानित व्यक्ति होने के आधार पर अग्रिम जमानत देने की मांग किया।
दर्ज प्राथमिकी के अनुसार राजा मान सिंह के साथ मुकदमों में सहआरोपी व जेल में निरुद्ध उपदेश यादव उर्फ बंटी की जमानत के लिए ग्राम प्रधान व जमानतदार के फर्जी हस्ताक्षर से अदालत में कूटरचित कागजात दाखिल किए गए थे। अदालत से सत्यापन कराए जाने पर मामला उजागर हुआ। पुलिस की छानबीन से सत्यता सामने आई। बस्ती के गोयरी पोखरनी निवासी श्याम नारायण शुक्ला की ओर से थाना पूरा कलंदर में उपदेश यादव उर्फ बंटी व उनके परिवार वालों के खिलाफ छल करते हुए कूटरचित फर्जी जमानत के कागजात तैयार करवाकर कोर्ट में दाखिल किए जाने का मुकदमा दर्ज कराया गया।
प्राथमिकी में कहा गया कि श्याम नारायण ग्राम प्रधान रहा है और वर्तमान में उसकी पुत्री प्रधान है। ग्राम पंचायत के जसईपुर गांव निवासी अनिल कुमार पुत्र विद्या सागर कागज उपदेश यादव के जमानत में लगाया गया। कागजात पर ग्राम प्रधान के फर्जी हस्ताक्षर व मुहर भी लगाई गई। राजा मान सिंह व राजा सिंह उर्फ दुष्यंत सिंह के बताए अनुसार बस्ती जिले के पेशेवर जमानतदारों को 15-15 हजार रुपये दिए गए। जमानतदारों को उपदेश यादव के भतीजे जय पाल सिंह ने उपलब्ध कराया था। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद आरोपी जय पाल सिंह की अग्रिम जमानत अर्जी निरस्त कर दी।