प्रारंभिक एसआईटी रिपोर्ट में 27 अप्रैल से पांच जून 2026 के बीच के सीसीटीवी फुटेज का हवाला देते हुए कहा गया था कि कर्मचारियों की गतिविधियों में करीब 70 बार नकदी छिपाकर बाहर ले जाने की बात सामने आई। रिपोर्ट में ट्रस्ट और एसबीआई की संयुक्त मानक कार्यप्रणाली का पालन नहीं होने तथा प्रवेश और निकास के दौरान कर्मचारियों की तलाशी नहीं लिए जाने की बात भी कही गई थी। हालांकि, फाइनल रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा को लेकर कोई आपराधिक जिम्मेदारी तय नहीं की गई है। यही वजह है कि प्रारंभिक जांच में उठे सवालों और अंतिम रिपोर्ट के निष्कर्षों के बीच अंतर को लेकर अब नई बहस शुरू हो गई है।
मामले को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी खूब हुए। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सबसे पहले सात जून को राम मंदिर में चढ़ावे की रकम से जुड़ा मामला उठाया था। इसके बाद आम आदमी पार्टी सांसद संजय सिंह भी चंपत राय पर लगातार सवाल उठाते रहे। लगातार बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच ट्रस्ट की मांग पर एसआईटी का गठन किया गया था। अब फाइनल रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा का नाम नहीं होने से जांच की दिशा को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।