चोरी हुई तो निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी?
मामले की प्रारंभिक जांच में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर कर्मचारियों द्वारा कई बार नकदी बाहर ले जाने की बात सामने आने की रिपोर्टें आई थीं। साथ ही कर्मचारियों की तलाशी, ड्रेस कोड और नकदी गिनने की मानक प्रक्रिया में खामियों का भी उल्लेख किया गया था। यहां जांच का मूल सवाल केवल यह नहीं होना चाहिए कि नकदी किसने उठाई, बल्कि यह भी होना चाहिए कि इतने लंबे समय तक यह सब चलता कैसे रहा?
अगर मंदिर की चढ़ावे की रकम की सुरक्षा के लिए निर्धारित एसओपी का पालन नहीं हुआ, कर्मचारियों की तलाशी नहीं हुई और नकदी की आवाजाही पर पर्याप्त निगरानी नहीं रही, तो उस पूरी व्यवस्था की निगरानी करने वाले अधिकारियों और पदाधिकारियों की जवाबदेही भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनती है।
आठ कर्मचारियों पर कार्रवाई
इस मामले में आठ कर्मचारियों अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
जांच पर प्रमुख सवाल
- निगरानी व्यवस्था में खामियां क्यों थीं?
- निर्धारित एसओपी का पालन क्यों नहीं हुआ?
- कथित तौर पर बार-बार नकदी बाहर जाने की जानकारी जिम्मेदार अधिकारियों तक क्यों नहीं पहुंची?
- ट्रस्ट और बैंक की संयुक्त व्यवस्था में चूक कहां हुई?
- बड़े पदाधिकारियों की जिम्मेदारी किस आधार पर तय या खारिज की गई?
- और प्रारंभिक जांच में उठे सवालों का अंतिम रिपोर्ट में क्या जवाब दिया गया?