अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर के नवनिर्मित देवालयों में राजा राम समेत आठ देव विग्रहों की प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव की पूर्व संध्या पर मंगलवार यानि दो जून को प्रायश्चित कर्म पूजा होगी। सैकड़ों की संख्या में महिलाएं पुण्य सलिला सरयू का पवित्र जल कलशों में भरकर मांगलिक यात्रा के रूप में सरयू तट से यज्ञमंडप तक पहुंचेंगी।
काशी के यज्ञाचार्य जयप्रकाश त्रिपाठी, उपाचार्य चंद्रभानु शर्मा (दिल्ली) और अमरनाथ ब्रह्मा (बस्ती) के साथ प्रयाग, काशी, देवप्रयाग, हरिद्वार, जम्मू, दिल्ली, कानपुर, कोलकाता, अयोध्या आदि स्थानों के 101 आचार्य अयोध्या पहुंच गए हैं। इन आचार्याें के साथ अयोध्या के आचार्य पंडित इंद्रदेव मिश्र, आचार्य प्रवीण शर्मा, पंडित राकेश तिवारी भी अनुष्ठान में मुख्य भूमिका निभाएंगे। इस निमित्त यज्ञशाला को पूरी तरह तैयार कर लिया गया है। इसके लिए ट्रस्ट की ओर से नियुक्त शैलेंद्र शुक्ल के अनुसार सभी आवश्यक सामग्री जुटा ली गई है। हवन पूजन व अनुष्ठान के सामान यज्ञ मंडप में पहुंचा दिए गए हैं।
दो जून मंगलवार को प्रायश्चित कर्म पूजा द्वितीय बेला में तीन बजे प्रारंभ होकर साढ़े चार बजे तक चलेगी। इसके संपन्न होते ही पुराने सरयू पुल के पूर्वी तट से महिलाओं की जलकलश यात्रा प्रारंभ होगी जो वीणा चौक, रामपथ, शृंगार हाट, हनुमान गढ़ी, दशरथ महल, रामकोट एवं रंगमहल बैरियर होते हुए साढ़े छह बजे तक यज्ञशाला पहुंचेगी। कलश यात्रा में शामिल महिलाओं व पुरुषों को मोबाइल ले जाने की अनुमति नहीं होगी। दो जून से प्राण प्रतिष्ठा का मुख्य अनुष्ठान शुरू होगा जो पांच जून तक चलेगा।
विहिप के मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने बताया कि शिखर पर स्वर्ण कलश की स्थापना का कार्य पांच जून से पहले पूरा कर लिया जाएगा। समारोह को लेकर उत्साह का माहौल है। राम मंदिर परिसर समेत यज्ञ मंडप की भव्य सजावट की जा रही है। फूल-माला, दीपों और ध्वज से मंदिर परिसर की साज-सज्जा की जा रही है। कहा कि यह आयोजन समूचे देश के लिए गौरव का विषय है। तीन दिवसीय उत्सव के माध्यम से एक नई आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होगा।