अयोध्या। मातृत्व सुख दिलाने में मददगार बनने वाली आशाओं से निराशा मिल रही है। जिले में 228 ऐसी आशा बहुएं चिह्नित हुई हैं, जिन्होंने माह भर में एक भी संस्थागत प्रसव नहीं कराया है। अब इन पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। अब इन्हें नोटिस दी जा रही है। अपेक्षित सुधार न होने पर उनकी सेवाएं समाप्ति के दावे किए जा रहे हैं।
जननी सुरक्षा योजना के तहत गर्भवती महिलाओं की समुचित देखभाल के साथ संस्थागत प्रसव के लिए जिले भर में 2,233 आशा बहुओं की नियुक्ति है। इन्हें संस्थागत प्रसव कराने पर छह सौ रुपये पारिश्रमिक दिया जाता है। इनमें अधिकांश आशा बहू तो अपने कार्यों को बखूबी अंजाम दे रही हैं, लेकिन काफी संख्या में आशा बहुएं लापरवाह हैं।
शुक्रवार को हुई जिला स्वास्थ्य समिति में स्वास्थ्य विभाग के पेश किए आंकड़ों के अनुसार जिले भर में 228 ऐसी आशा बहुएं हैं, जिन्होंने माह भर में एक भी प्रसव नहीं कराया है। इनमें हैरिंग्टनगंज ब्लॉक की सर्वाधिक 37, मिल्कीपुर की 33, बीकापुर की 32, मया बाजार की 30 आशा बहू शामिल हैं। वहीं, जिले भर में 577 आशा बहुओं ने सिर्फ एक, 559 ने सिर्फ दो और 358 ने तीन प्रसव कराए हैं। जबकि 511 ऐसी रहीं, जिन्होंने तीन या तीन से अधिक प्रसव कराए हैं।
सरकारी अस्पतालों में निशुल्क और बेहतर प्रसव सेवाएं मौजूद होने के बावजूद कई आशा बहुएं निजी केंद्रों के लिए भी काम करती हैं। सरकारी अस्पतालों की तमाम खामियां गिनाकर मरीजों को निजी केंद्रों पर ले जाती हैं, जहां अपना कमीशन लेकर रफूचक्कर होती हैं। बीते दिनों सीएमओ ने कुछ केंद्रों पर छापा मारा तो इसकी पुष्टि हुई और संबंधित आशाओं के खिलाफ कार्रवाई भी की गई।
जिला महिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज के अलावा तहसील मुख्यालय पर स्थित सीएचसी (एफआरयू) पर भी सिजेरियन प्रसव के इंतजाम हैं। वहीं, जिले की सभी 28 पीएचसी व आठ नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सामान्य प्रसव सुविधा है। वहीं, निजी केंद्र पर सामान्य प्रसव के लिए 10 से 15 हजार व सिजेरियन प्रसव के लिए 25 से 40 हजार तक लिए जा रहे हैं।
सीएमओ डॉ. सुशील कुमार बानियान ने बताया कि आशा बहुओं के कार्य की नित्य समीक्षा हो रही है। माह भर में शून्य प्रसव कराने वाली 228 आशाओं पर सबसे पहले कार्रवाई होगी। उन्हें नोटिस दी जा रही है। कार्य में सुधार न होने पर उनकी सेवा समाप्त कराई जाएगी।