अयोध्या। कार बुक करने के बहाने से बिहार ले जाकर हत्या व लूट के आरोपी विभव तिवारी को कोर्ट ने राहत देने से इन्कार कर दिया। अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय दीपक यादव ने जेल में निरुद्ध आरोपी की जमानत अर्जी सुनवाई के बाद निरस्त कर दी।
अभियोजन के अनुसार कोतवाली नगर के हैदरगंज मोहल्ला निवासी अजीत गुप्ता ने किशोरी शास्त्री से होम स्टे चलाने के लिए लिया था। पैसों के लेनदेन को लेकर बलराम झा, विभव और रौनक से विवाद हुआ था। इसी रंजिश के कारण अनमोल मिश्रा के घर पर सभी लोगों ने मिलकर अजीत गुप्ता को ठिकाने लगाने की योजना बनाई। किशोरी शास्त्री ने फोन करके अजीत गुप्ता की गाड़ी बुक कराई और बिहार ले जाकर लूटपाट करके हत्या कर दी। सबूत छिपाने की नीयत से शव को मुजफ्फरपुर जिले के थाना सकरा क्षेत्र में राम कुमार ठाकुर के बगीचे में फेंक दिया।
हत्या के मामले में बिहार निवासी बलराम झा, किशोरी शास्त्री, बस्ती निवासी विभव तिवारी व अयोध्या निवासी विशाल पांडेय को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों के पास से लूटी गई कार बरामद की गई है। जेल में निरुद्ध विभव तिवारी ने अदालत में जमानत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। तर्क दिया कि उसे झूठा फंसाया गया है। कई महीनों से वह जेल में बंद है। अभियोजन पक्ष से जमानत का विरोध किया गया। तर्क दिया गया कि अजीत गुप्ता की नृशंस हत्या में आरोपी विभव तिवारी की संलिप्तता पाई गई है। न्यायाधीश ने पत्रावली पर मौजूद तथ्यों व जमानत का पर्याप्त आधार न पाते हुए जमानत अर्जी निरस्त कर दी।