अयोध्या। फर्जी जमानत दाखिल करने के बहुचर्चित मामले में आरोपी अधिवक्ता मनोज कुमार को भी अदालत ने राहत देने से इन्कार कर दिया।
यह आदेश अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय की अदालत से पारित किया गया है। बस्ती जनपद निवासी आरोपी मनोज कुमार ने अदालत में जमानत अर्जी दाखिल करते हुए कहा कि वह निर्दोष है। बस्ती जिले में वकालत पेशे से जुड़ा है। अधिवक्ता होने के कारण रंजिशन उसे फर्जी फंसाया गया है।आरोपी की ओर से जमानत पर रिहा किए जाने की मांग की गई।
जमानत अर्जी का विरोध करते हुए एडीजीसी फौजदारी की ओर से तर्क दिया गया कि आरोपी ने ही फर्जीवाड़ा करके जमानत बांड तैयार करवाया और कोर्ट में दाखिल करवाया है। गिरोह बनाकर फर्जी जमानत के कागजात तैयार करना इनका पेशा है। दर्ज प्राथमिकी के अनुसार राजा मान सिंह के साथ मुकदमों में सहआरोपी व जेल में निरुद्ध उपदेश यादव उर्फ बंटी की जमानत के लिए ग्राम प्रधान व जमानतदार के फर्जी हस्ताक्षर से अदालत में कूट रचित कागजात दाखिल किए गए थे। अदालत से सत्यापन कराए जाने पर मामला उजागिर हुआ। पुलिस की छानवीन से सत्यता सामने आई।
बस्ती जिले के गोयरी पोखरनी निवासी श्याम नारायण शुक्ला की ओर से थाना पूराकलंदर में उपदेश यादव उर्फ बंटी व उनके परिवार वालों के खिलाफ छल करते हुए कूट रचित फर्जी जमानत के कागजात तैयार करवाकर कोर्ट में दाखिल किए जाने का मुकदमा दर्ज कराया गया। प्राथमिकी में कहा गया कि श्याम नारायण ग्राम प्रधान रहा है और वर्तमान में उसकी पुत्री प्रधान है। ग्राम पंचायत के जसई पुर गांव निवासी अनिल कुमार पुत्र विद्या सागर कागज उपदेश यादव के जमानत में लगाया गया। कागजात पर ग्राम प्रधान के फर्जी हस्ताक्षर व मुहर भी लगाई गई।
न्यायाधीश ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद आरोपी मनोज कुमार की जमानत अर्जी निरस्त कर दिया।