अयोध्या। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के ज्ञान भारतम् मिशन की ओर से गत मई में शुरू किए गए राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के पहले चरण में पूरे देश में पांडुलिपियों का खजाना मिला है। पहले चरण के सर्वे में देशभर से 1,23,24,420 पांडुलिपियां रिपोर्ट की गई हैं। इनमें से 5,31,818 पांडुलिपियां प्रकाशित की जा चुकी हैं, जबकि 3,59,60,969 चित्र भी प्रकाशित किए गए हैं।
पहले चरण के तहत यूपी के सभी जिलों में चले अभियान में अयोध्या में सबसे ज्यादा तीन लाख 69 हजार से अधिक पांडुलिपियां मिली थीं। दूसरे नंबर पर वाराणसी रहा था। इसलिए दूसरे चरण का सर्वे अभियान भी अयोध्या और वाराणसी से शुरू किया गया है।
पहले चरण में पांडुलिपियों का सर्वे कर उनकी उपलब्धता और विवरण का डिजिटल डाटा तैयार किया गया। अब दूसरे चरण में पहले से अपलोड की गई पांडुलिपियों की नए सिरे से स्कैनिंग कराई जाएगी। दूसरा चरण प्रारंभ हो गया है। स्कैनिंग के दौरान निर्धारित तकनीकी और गुणवत्ता मानकों पर पांडुलिपियों को परखा जाएगा। जो पांडुलिपियां तय मानकों के अनुरूप होंगी, उनका व्यवस्थित रूप से डिजिटलीकरण कराया जाएगा।
दूसरे चरण में डिजिटल रिकॉर्ड की गुणवत्ता और मानकीकरण पर फोकस रहेगा। दोबारा स्कैनिंग के बाद मानकों के अनुरूप पांडुलिपियों को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित किया जाएगा। इससे दुर्लभ और प्राचीन पांडुलिपियों की सामग्री को लंबे समय तक संरक्षित रखने के साथ शोधकर्ताओं और नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
209 पांडुलिपियों पर हुआ ओसीआर
- ज्ञानभारतम् के आंकड़ों के अनुसार अब तक 209 पांडुलिपियों पर ओसीआर (ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन) की प्रक्रिया पूरी की गई है। ओसीआर तकनीक के माध्यम से पांडुलिपियों में मौजूद लिखित सामग्री को डिजिटल टेक्स्ट में बदलने में मदद मिलती है। इससे भविष्य में इन सामग्री को खोजने, पढ़ने और शोध के लिए इस्तेमाल करने में सुविधा होगी।