अयोध्या। लखनऊ-गोरखपुर हाईवे पर लगभग नौ एकड़ में विकसित होने जा रहा अयोध्या धाम बस पोर्ट न केवल आधुनिक परिवहन का केंद्र बनेगा बल्कि रामनगरी की सांस्कृतिक विरासत को भी जीवंत करेगा। यह परियोजना राज्य परिवहन निगम और बी-टुगेदर के सहयोग से पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर तैयार होगी। परियोजना के अनुसार बस पोर्ट को एक सेंटर पॉइंट के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां यात्रियों की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है।
यात्रियों की सहूलियत के लिए 20 प्रस्थान प्लेटफार्म, 35 बस पार्किंग, 7 इलेक्ट्रिक बस चार्जिंग पॉइंट, 281 दोपहिया और 70 चारपहिया पार्किंग की व्यवस्था होगी। इसके साथ ही 1,870 वर्ग मीटर का यात्री प्रतीक्षालय, 191 वर्ग मीटर का वातानुकूलित लाउंज, 388 वर्ग मीटर का कैंटीन-फूड कोर्ट, क्लॉक रूम, पार्सल कक्ष और 100 वर्ग मीटर का स्टॉल एरिया बनाया जाएगा। स्वच्छता पर विशेष ध्यान देते हुए 13 मूत्रालय, 18 शौचालय और चालक दल के लिए अलग व्यवस्था भी की जाएगी। यात्रियों को सूचना देने के लिए डिजिटल टिकटिंग काउंटर, रीयल-टाइम बस ट्रैकिंग सिस्टम, सूचना कियोस्क और सीसीटीवी सर्विलांस की सुविधा उपलब्ध होगी।
स्टेशन परिसर में बैंक एटीएम, डाकघर, व्यापार केंद्र, आपातकालीन चिकित्सा केंद्र, पुलिस बूथ, सुरक्षा नियंत्रण कक्ष और प्रशासनिक कार्यालय जैसी सुविधाएं भी होंगी। कुल मिलाकर 4,686 वर्ग मीटर क्षेत्रफल केवल बस स्टेशन सुविधाओं के लिए नियोजित है।
विशेष बात यह है कि अयोध्या धाम बस पोर्ट का स्वरूप रामायण कालीन वास्तुकला पर आधारित होगा। यहां दीवारों और आंतरिक सज्जा में रामायण काल के चित्रों को स्थान दिया जाएगा, जिससे यात्रियों को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक अनुभव भी मिल सके।
क्षेत्रीय प्रबंधक विमल राजन ने बताया कि अयोध्या का यह बस पोर्ट यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान करेगा और शहर के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। इसका रामायण कालीन स्वरूप न केवल अयोध्या की पहचान को मजबूत करेगा बल्कि पर्यटन को भी नई दिशा देगा।