अयोध्या। पर्यावरण सरंक्षण की मुहिम को आगे बढ़ाते हुए मियावाकी पद्धति से जिले में 55 स्थानों पर वैदिक वनों को विकसित किए जाने का काम पूरा हो गया है। इन वनों में रोपित किए गए पौधों को सुरक्षित रखने के लिए जीपीएस टैगिंग की गई है। इसके साथ ही पौधों की नियमित सिंचाई के भी इंतजाम किए गए हैं।
जिले के हर ब्लॉक में पांच की संख्या में वैदिक वनों की स्थापना की गई है। इसके लिए खंड विकास अधिकारियों की ओर से स्थानों का चयन किया गया था। इन्हीं चयनित स्थानों पर वन विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए पौधों का रोपण मियावाकी पद्धति से कर दिया गया है। पौधरोपण करने के लिए मनरेगा के माध्यम से मजदूरों को लगाया गया था। तय समय सीमा में इन मजदूरों ने पौधे रोपित कर दिए हैं।
मनरेगा की अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी ज्योर्तिमय गुप्ता के अनुसार इन वैदिक वनों में मियावाकी पद्धति से पौधों को पास-पास लगाया गया है। बड़े होने पर ये पौधे वनों की तरह घने हो जाएंगे। इससे प्रदूषण नियंत्रित होने के साथ वातावरण भी शुद्ध होगा। यह तकनीक जापानी वनस्पति शास्त्री अकीरा मियावाकी की ओर से विकसित की गई है। इस तकनीक के माध्यम से रोपित किए गए पौधे छोटे से क्षेत्र में इस तरह से उगते हैं कि उन्हें सूर्य की रोशनी ऊपर से मिलती है। वे बगल की बजाय ऊपर की ओर ही बढ़ते हैं।
मुख्य विकास अधिकारी कृष्ण कुमार सिंह ने अमर उजाला को बताया कि सभी वैदिक वनों में पौधे रोपित किए जाने का काम पूरा हो गया है। इन सभी पेड़ों को सुरक्षित रखने के तकनीकी उपाय किए गए हैं। वनों के बाहरी छोर पर चारों तरफ फेंसिंग करवाई गई है। अगले तीन महीने तक वनों में रोपित किए गए सभी पौधों की विशेष देखभाल की जाएगी। यदि कोई पेड़ मुरझा जाता है तो उसके स्थान पर बदल कर दूसरा पेड़ लगाया जाएगा। राजकीय और निजी नलकूपों के माध्यम से सिंचाई का प्रबंध किया गया है। जिन वनों के आसपास नलकूप नहीं हैं, वहां पर बोरिंग करवाई गई है।