अयोध्या। बहन से मिलने आई उसकी सहेली से चाय में बेहोशी की दवा मिलाकर दुष्कर्म करने व गर्भपात कराने में दोषी करार अभियुक्त को 34 साल की सजा सुनाई गई है। उस पर 70,000 रुपये जुर्माना भी लगा है। यह फैसला अपर सत्र न्यायाधीश/ एफटीसी प्रथम प्रदीप सिंह ने बृहस्पतिवार को सुनाया है। जुर्माने की आधी धनराशि पीड़िता को देने का आदेश हुआ है।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक घटना 28 मई वर्ष 2016 की कैंट थाना क्षेत्र की है। शहर के एक मोहल्ला निवासिनी पीड़िता के घर के पास ही अविनाश की बिजली की दुकान थी, जिसमें पीछे कमरे में वह परिवार के साथ रहता था। अविनाश की बहन पीड़िता की सहेली थी। पीड़िता अपनी सहेली से मिलने गई थी। घर पर अविनाश अकेला था। उसने बताया कि उसकी बहन अभी आ रही है। तब तक वह चाय बनाकर लाया। चाय पीते ही चक्कर आने के बाद वह बेहोश हो गई। होश आने पर उसके शरीर पर कपड़े नहीं थे। उसने अविनाश से अपने साथ दुष्कर्म का विरोध किया तो अविनाश ने कहा कि जो होना था हो गया। किसी से बताओगी तो फोटो और वीडियो बना लिया है, वायरल कर दूंगा। वीडियो दिखाकर बदनाम करने की धमकी देकर कई बार उसने दुष्कर्म किया। गर्भवती होने पर जबरदस्ती दवा खिलाकर गर्भपात करा दिया।
घर में भाई को घटना की जानकारी होने पर उसने पीड़िता को घर से निकाल दिया तो नारी निकेतन में रहने लगी। अविनाश नागपुर चला गया। 28 मई वर्ष 2016 को अविनाश ने फोन कर बनाई गई वीडियो की चिप देने के बहाने से बुलाया। शाम सात बजे सहादतगंज स्थित एक स्कूल में ले जाकर दुष्कर्म करने लगा तो नारी निकेतन की संचालिका को पीड़िता ने फोन कर दिया और इस बीच पुलिस आ गई। पीड़िता की तहरीर पर थाना कैंट में मुमताजनगर निवासी अविनाश तिवारी के खिलाफ दुष्कर्म सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ। विवेचना थाना कोतवाली नगर की पुलिस ने करने के बाद आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया।
अभियोजन पक्ष से पीड़िता सहित आठ गवाह पेश किए गए। न्यायाधीश ने घटना को समाज पर एक कलंक और विरलतम अपराध मानते हुए अभियुक्त अविनाश को दुष्कर्म के अपराध में 10 साल के कठोर कारावास व 30,000 रुपये जुर्माना, जबरन गर्भपात करने के अपराध में 10 साल के कठोर कारावास व 20,000 रुपये जुर्माना से दंडित किया। वहीं चाय में बेहोशी की दवा मिलाकर पिलाने के मामले में 10 साल के कठोर कारावास व 10,000 रुपये जुर्माना, धमकी देने के मामले में चार साल के कठोर कारावास और 10,000 रुपये जुर्माना से दंडित किया है। सभी सजाएं साथ-साथ चलने के आदेश के कारण अभियुक्त को अधिकतम 10 साल जेल में बिताने होंगे। सजा सुनाने के बाद अभियुक्त को कड़ी सुरक्षा में मंडल कारागार भेज दिया गया।