फोटो 28 एयूआरपी 35 गौहानी कलां गांवस के रास्ते पर नाव से जरूरी सामान लेकर आते लोग। संवाद
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अजीतमल। चार दिन तबाही मचाने के बाद अब यमुना का जलस्तर लगातार घट रहा है। गुरुवार सुबह यमुना नदी खतरे के निशान से दो मीटर नीचे पहुंच गई। ग्रामीणों और प्रशासन ने राहत की सांस ली है। हालांकि गौहानीकलां संपर्क मार्ग पर अभी पानी भरा है। इससे वहां पर नाव से आवागमन हो रहा है। उम्मीद है कि शुक्रवार तक यहां से भी पानी निकल जाएगा।
पिछले चार दिन से यमुना में कोटा बैराज से छोड़े गए पानी के कारण 20 गांव से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में आ गए थे लेकिन अब तीन दिन से धीरे-धीरे पानी घट रहा है। जलस्तर कम होने से इटावा संपर्क मार्ग पूरी तरह खुल गया है। हालांकि गौहानी कलां मार्ग में भरे पानी से स्थिति सामान्य नहीं हो सकी है। इस मार्ग पर अभी भी लोग नाव से आवागमन कर रहे हैं। गुरुवार को सुबह आठ बजे यमुना का जलस्तर 111.59 मीटर तो सुबह 10 बजे 111.42 मीटर रिकार्ड किया गया जो खतरे के निशान से दो मीटर नीचे है। एसडीएम निखिल राजपूत ने बताया यमुना का जलस्तर लगातार कम हो रहा है। अब खतरे की कोई बात नहीं है। तहसील प्रशासन सहित अन्य विभाग के कर्मचारी लगातार गांवों में पहुंच कर राहत कार्य कर रहे हैं।
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टीमों ने किया मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण
अजीतमल सीएचसी अधीक्षक के निर्देशन में तीन स्वास्थ्य टीमें बाढ़ क्षेत्र के सिकरोड़ी, गौहानी कलां व बड़ेरा में शिविर लगाकर मरीजों का परीक्षण कर रही हैं। यहां सबसे ज्यादा मरीज चर्मरोग के सामने आ रहे हैं। इनको एंटी फंगस व ओआरएस घोल वितरण किया जा रहा है। अधीक्षक अशोक राय ने बताया कि दस्त के छह, पेचिश के चार व बुखार के पांच मरीज पाए गए हैं जबकि चर्मरोग के 46 मरीज मिले हैं। इसके अलावा 28 लोग अन्य बीमारियों से ग्रसित पाए गए हैं। इन मरीजों को दवा वितरण की गई है। बताया कि बाढ़ के पानी से सबसे ज्यादा त्वचा की समस्या होती है।