शेरगढ़ घाट स्थित यमुना नदी पुल की रेलिंग पांच दिन पूर्व किसी कारण से टूट गई थी। चूंकि यमुना में कई दिनों तक पानी का जलस्तर बढ़ने के कारण देखने वालों की भीड़ भी पुल पर जमा हो रही थी। इससे कभी भी कोई बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती थी।
इस बीच पुलिस से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक ने यमुना बाढ़ का पुल पर पहुंचकर जायजा लिया। अनदेखी होते देख अमर उजाला ने खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। खबर प्रकाशित होते ही अगले ही दिन जिला प्रशासन ने रेलिंग ठीक करवाई।
यमुना नदी पुल पर अज्ञात कारणों के चलते पुल की रेलिंग का एक हिस्सा टूट गया। डेढ़ मीटर के हिस्से की रेलिंग टूटने से वह हिस्सा खुला रह गया था, जिससे थोड़ी से चूक होने पर कोई भी सीधा यमुना में गिर सकता था। खास बात यह है कि उक्त रेलिंग चार दिन तक टूटी पड़ी रही।
इस बीच पुलिस से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक ने यमुना पुल से बढ़े जलस्तर का जायजा लिया, लेकिन किसी ने भी इस ओर ध्यान देने की जरूरत महसूस नहीं की।
वहीं ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ देखने आए अधिकारियों से उन्होंने रेलिंग टूटी होने की जानकारी दी, लेकिन किसी ने भी उनकी बात नहीं सुनी और न ही टूटी रेलिंग देखने गए।
मामला जब अमर उजाला के संज्ञान में आया तो 31 जुलाई के अंक में प्रमुखता से खबर प्रकाशित की, फिर क्या था अगले ही दिन जिला प्रशासन के आदेश पर लाव लश्कर के साथ पहुंचे संबंधित विभाग के लोगों ने उक्त टूटी रेलिंग ठीक कराई। अमर उजाला के इस प्रयास के बाद समस्या का हल होते देख ग्रामीणों ने धन्यवाद ज्ञापित किया।