औरैया। यमुना का पानी जहां जीवनदायिनी है, वहीं बाढ़ आने पर तबाही भी मचा देती है। यमुना किनारे बसा अस्ता गांव हर साल तबाही का दंश झेल रहा है। तटवर्ती गांव होने के नाते यमुना के उफान मारने पर सबसे पहले पानी इसी गांव में पहुंचता है। गांव वाले कहते हैं कि साल भर तिनका-तिनका सहेज कर गृहस्थी बसाना और बाढ़ आने पर उजड़ जाना, हर साल उनके जीवन का हिस्सा हो गया है। इस बार फिर से यमुना का पानी गांव में पहुंच गया है। फसलें बर्बाद होने की कगार पर हैं।
गुरुवार को गांव का जायजा लेने पर खास बात यह पता चली कि यहां के ग्रामीणों को पिछली बाढ़ में फसल बर्बाद होने का मुआवजा अभी तक नहीं मिला है, अब फिर से उनके खेतों में पानी भरने लगा हैं और फसलें नष्ट होने की नौबत आ गई है। वहीं, अभी तक अधिकारियों ने निरीक्षण कर ग्रामीणों को सिर्फ आगाह किया है कि बाढ़ का पानी गांव में आने से पहले गांव खाली कर देना। इसके अलावा अन्य कोई सहूलियत की बात नहीं कही है।
इस बार यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से अभी लगभग छह मीटर दूर है। खतरे के निशान पर पहुंचने से पहले नदी का पानी अस्ता गांव को अपनी चपेट में ले लेता है। बीते साल की बाढ़ से तबाही को याद कर गांव के लोग आज भी सिहर उठते हैं। ग्रामीणों से बातचीत में पता चला कि उस समय 22 किसानों की 40 बीघा फसल बर्बाद हो गई थी। नष्ट होने वाली फसलों में बाजरा, उड़द व सब्जियां आदि थीं। उस समय तबाह हुए किसानों व ग्रामीणों की मदद को पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने आश्वासन तो दिया, लेकिन मदद आज तक नहीं मिली।
बीहड़ में यमुना नदी किनारे बसे गांव अस्ता तक बिजली और सड़क तो पहुंच गई, लेकिन गांव के लोगों के पास गुजर बसर के लिए खेती ही साधन है। बाढ़ की चपेट में आकर खेती नष्ट होने पर इनके सामने दो वक्त की रोटी जुटाने की समस्या खड़ी हो जाती है।
गांव वाले बताते हैं कि बीत साल बाढ़ आने पर गलियां जलमग्न हो गईं थी। गांव के चारों ओर पानी भर गया था। मुख्य मार्ग पर गांव के बाहर पांच से छह फीट तक पानी भरा था। गांव में पानी पहुंचने से कच्चे घरों को नुकसान तो हुआ ही पक्के घरों को भी नुकसान पहुंचा था। ग्रामीण रामदीन मजदूरी व खेती करके परिवार चलाते हैं। किसी तरह कच्चे मकान को पक्का तो बना लिया। लेकिन पिछले साल यमुना के पानी ने उनके मकान की नींव कमजोर कर दी और मकान कई जगह से दरक गया। रामदीन और उसकी पत्नी ने बताया कि अधिकारियों ने 10 बार निरीक्षण किया, लेकिन आज तक किसी तरह की कोई मदद नहीं की। ग्रामीणों की हर्जाना न मिलने की समस्या एडीएम रेखाएस चौहान से बताने पर उन्होंने जांच कराने की बात कही है।