फोटो-3-च्यवनप्राश व आंवला कैंडी की पैकिंग करतीं महिलाएं। स्रोत:कर्मी
औरैया। सर्दी में च्यवनप्राश हमें बीमारियों से बचाता है। इसे ही आधार बनाकर भाग्यनगर ब्लॉक के वैसुंधरा गांव की महिलाओं ने कारोबार खड़ा किया।
उन्होंने च्यवनप्राश से लेकर आंवले की कैंडी बनाकर बाजार में उतार दी। इसकी डिमांड इन दिनों ज्यादा है। महिलाओं का यह प्रयास दूसरों को स्वावलंबन की राह भी दिखा रहा है।
एनआरएलएम की ओर से महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए स्वयं सहायता समूह के जरिये व्यवसायों से जोड़ा जा रहा है। महिलाओं के बनाए गए उत्पाद बाजार में अपनी जगह भी बनाने लगे हैं। इस कड़ी में सर्दी के सीजन में च्यवनप्राश की डिमांड बढ़ी है। जिले में ही महिलाएं इसे बनाकर रोजगार पा रही हैं।
भाग्यनगर ब्लॉक के गांव वैसुंधरा निवासी मेनका ने अपने समूह की 10 महिलाओं के संग यह काम शुरू किया है। आंवला की कैंडी, चटनी समेत च्वयनप्राश बना रही हैं। अलग-अलग वजन की पैकिंग कर इसकी बाजार में बिक्री की जा रही है। साथ ही इस प्रोडक्ट को ऑनलाइन शॉपिंग एप पर बिक्री करने के लिए रजिस्ट्रेशन की कवायद भी शुरू कर दी गई है।
गेल ने भी सहयोग करते हुए अपने कैंपस में महिलाओं को दुकान लगाने के लिए जगह दी है। वहीं, दुकानों पर भी उनके उत्पाद पहुंच रहे हैं।
वैसुंधरा गांव की महिलाएं च्यवनप्राश बना रही हैं। उनका उत्पाद बाजार में काफी पसंद किया जा रहा है। अब उत्पादों की ऑनलाइन शॉपिंग एप पर बिक्री कराने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
-एसएन सिंह, डीसी, एनआरएलएम