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Auraiya News: झोलाछाप के इलाज से महिला की मौत

Sat, 23 Sep 2023 11:21 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
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अजीतमल। बाबरपुर के शास्त्रीनगर मोहल्ले में एक मेडिकल स्टोर में क्लीनिक चला रहे झोलाछाप के इलाज से महिला की हालत बिगड़ गई। परिजन उसे लेकर इटावा जिला अस्पताल पहुंचे। जहां डॉक्टरों ने मृतक घोषित कर दिया। देर शाम परिजन शव लेकर क्लीनिक पर पहुंचे और झोलाछाप पर गलत इलाज करने का आरोप लगा हंगामा शुरू कर दिया। पुलिस व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने क्लीनिक सील करने के साथ शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
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झोलाछाप के इलाज से महिला की मौत व हंगामे की जानकारी पर सीओ भरत पासवान, कोतवाली प्रभारी ललित कुमार मौके पर पहुंचे। इसके कुछ देर बाद ही अजीतमल सीएचसी प्रभारी डॉ. अवनीश कुमार व तहसीलदार जीतेश वर्मा भी पहुंच गए। हंगामा कर रहे लोगों को पुलिस ने कार्रवाई का आश्वासन देकर शांत कराया। बाबरपुर निवासी खुशीराम ने अधिकारियाें को बताया कि पत्नी पार्वती (40) को दो दिन से बुखार आ रहा था। वह शास्त्रीनगर में एक मेडिकल स्टोर में क्लीनिक चला रहे युवक से इलाज करा रहा था। शनिवार दोपहर पत्नी को इलाज के लिए लाया था।
आरोप लगाया कि यहां पर झोलाछाप ने पत्नी को एक बोतल (ड्रिप) चढ़ा दी। कुछ देर बाद हालत बिगड़ी तो उसे इटावा के मोतीझील स्थित जिला अस्पताल ले जाने की बात कह क्लीनिक बंद कर चला गया। जिला अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने बताया कि पार्वती की काफी देर पहले मौत हो चुकी है। पति व बेटी अंजली ने गलत इलाज करने का आरोप लगाया। सीएचसी अधीक्षक ने जांच करने के बाद मेडिकल स्टोर की आड़ में चल रही क्लीनिक को सील कराया। बताया कि जब वह पहुंचे तो क्लीनिक बंद था। क्लीनिक पंजीकृत नहीं है। वहीं सीओ भरत पासवान ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर झोलाछाप के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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लगातार हो रही मौत, एक दिन चला अभियान
जिलाधिकारी नेहा प्रकाश ने झोलाछाप व अवैध अस्पतालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश स्वास्थ्य विभाग को दिए हैं। शुक्रवार को निर्देश के बाद छापेमारी अभियान चला। अधिकारियों ने सात क्लीनिक सील करने के बाद संचालकों को नोटिस थमा खानापूर्ति कर ली। मगर जिले में झोलाछाप के इलाज पर अंकुश नहीं लगा। यहीं वजह रही कि अजीतमल में शनिवार को एक और महिला गलत इलाज का शिकार हो गई। विभागीय सूत्र बताते हैं कि जिन क्लीनिकों व अस्पतालों को बंद कराया गया है। उनके संचालक पंजीकरण के लिए विभाग के चक्कर लगा रहे हैं।
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