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कम गेहूं उत्पादन से घटी मंडी की आय

Mon, 23 May 2016 11:41 PM IST
Auraiya, Uttar pradesh, India
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शहर की कृषि उत्पादन मंडी समिति - फोटो : अमर उजाला
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सूखे की भेंट चढ़ी गेहूं की फसल मंडी की आमदनी को भी तगड़ा झटका दे रही है। सामान्य सत्रों की फसल उत्पादन की तुलना में मंडी में गेहूं फसल की कम आवक के चलते कृषि उत्पादन मंडी समिति को बीते दो सालों के सापेक्ष अप्रैल माह में ही 15 लाख 46 हजार रुपये का नुकसान हुआ है।   रबी सीजन 2015-16 में 1.4 लाख हेक्टेयर भूमि पर जिले के 144778 किसानों व 89913 कृषक श्रमिकों ने गेहूं फसल की बोआई की थी। शुरुआती दौर में सूखी नहरें, फिर प्रतिकूल तापमान और अंतिम समय पर बारिश के इंतजार में चूके किसानों की सूखी गेहूं फसल उत्पादन 50 फीसदी तक गिरा है।
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इतना ही नहीं जिले में गेहूं कम उत्पादन होने से लघु सीमांत किसानों तक को खाने के लिए गेहूं का इंतजाम करने की नौबत आ रही है। ऐसे में जिले में गेहूं फसल के कम उत्पादन का सीधे तौर पर प्रभाव कृषि उत्पादन मंडी समिति पर पड़ता देखा जा रहा है। जहां सामान्य फसल उत्पादन सत्रों की मई माह में शहर के मंडी समिति में प्रतिदिन 18 हजार क्विंटल तक आने वाला गेहूं की आवक इन दिनों चार से पांच हजार क्विंटल पर ठहरी नजर आ रही है। इतना ही साल 2012-13 के मई माह में मंडी को हुई 45 लाख 48 हजार 161 रुपये की आय साल 2015-16 के गेहूं खरीद सत्र में घटकर 30 लाख दो हजार 620 के हाशिए पर सिमट गई है। आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2013-14 गेहूं खरीद सत्र के अप्रैल माह में मंडी में 49 हजार 260 कुंतल गेहूं की आवक दर्ज की गई थी। वहीं रबी सीजन के पिछले दो सत्रों में गेहूं फसल का उत्पादन गिरने से साल 2016-17 के अप्रैल माह में घटकर 35 हजार 611 कुंतल ही मंडी में गेहूं की आवक हो सकी है।

दम तोड़ रही सिकंदरा की मंडी
शहर में स्थित कृषि उत्पादन मंडी समिति से जिले की दिबियापुर, बेला, बाबरपुर, बिधूना की उपमंडियों के साथ कानपुर देहात जिले की सिकंदरा मंडी समिति भी संबद्ध है। दो सालों से मौसम की प्रतिकूलता के कारण जिले की अन्य हाटपैउ मंडियों के साथ ही सिकंदरा की मंडी भी व्यवसायिक दृष्टि से दम तोड़ती जा रही है। साल 2016-17 की गेहूं खरीद की शुरुआत से लेकर अब तक इस मंडी में केवल 70 किसानों से 6735 क्विंटल ही गेहूं की आवक हो सकी है।
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अप्रैल 2015 में सबसे कम आवक
पिछले चार सालों में गेहूं की आवक और आय पर गौर करें तो साल 2015 मंडी के लिए सबसे खराब साबित हुआ है। उक्त साल में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की भेंट चढ़ी रबी सीजन की फसलों में मंडी में गेहूं की आवक पचास फीसदी कम होने से इतने ही फीसदी का नुकसान हुआ है।

एमएसपी से आगे निकला मंडी भाव
इसे खुशनसीबी ही कहेंगे कि जिले में गेहूं का कम उत्पादन होने के बाद भी मंडी में लगातार ऊंचे उठ रहे गेहूं के भाव आर्थिक रूप से टूटे किसानों के जख्मों पर मरहम लगाते आ रहे हैं। साल 2016 की गेहूं खरीद सत्र की शुरुआत में मंडी में 1420 से खुले भाव चरम पर खरीद पहुंचते-पहुंचते सरकार की ओर से निर्धारित 1525 रुपये प्रति क्विंटल को पार कर आगे निकल गए हैं। गुरुवार को मंडी में गेहूं 1505, शुक्रवार को 1550 तो शनिवार को मंडी की निजी आढ़तों पर 1560 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से किसानों से गेहूं की खरीद की गई।

पिछले साल की तुलना में मंडी की गेहूं की आवक में सुधार हुआ है। इसके पीछे के साल में मंडी के लिए बेहद मुनाफे वाले रहे हैं। दो सालों से मंडी की आय घटी भी है। यह श्रंखलाबद्ध प्रक्रिया है। उत्पादन मंडी की आय का प्रभावित करती है।
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                         पार्थ सारथी
                    मंडी सचिव, औरैया
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