औरैया। गेहूं खरीद केंद्रों पर नियम केवल छोटे किसानों के लिए हैं, चहेते किसानों के लिए तो केंद्र प्रभारी कुछ भी करने को तैयार हैं।
इसकी बानगी मंडी में संचालित खाद्य विभाग के क्रय केंद्रों पर देखने को मिली। यहां मिनी ट्रक से लाया गया गेहूं सीधे बोरों में ही पलटकर तौला जा रहा था। इतना ही नहीं गेहूं बेचने वाले किसान के अभिलेख या अन्य कोई जानकारी भी केंद्र प्रभारी के पास नहीं थी। वह जल्द किसान के अभिलेख लेकर आने की बात कहते रहे।
किसानों से गेहूं खरीदने के लिए जिले में 58 सरकारी क्रय केंद्र बनाए गए हैं। यहां 2585 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद की जानी है। साथ ही गेहूं की तौल से पहले उसकी छनाई आदि के लिए किसान को 20 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अतिरिक्त भुगतान किया जाता है।
तौल के दौरान किसान को यह रुपये नकद देने पड़ते हैं लेकिन मंडी में संचालित खाद्य विभाग के दो केंद्रों पर अलग ही खेल चल रहा है। केंद्र पर गेहूं से लदा एक मिनी ट्रक और एक पिकअप खड़ा था। मजदूर सीधे ही लोडर से गेहूं के बोरे खींचकर क्रय केंद्र के बोरों में पलटते और तौल करके रख देते।
यह खेल धड़ल्ले से चल रहा था। यहां न तो गेहूं की सफाई की चिंता था न किसी नियम की। गेहूं की छनाई के लिए दिए गए इलेक्ट्रिक छन्ने क्रय केंद्र के बाहर दूर पड़े थे। इसमें भरे पत्ते देख साफ पता चल रहा कि बीते एक दो दिन में गेहूं की छनाई नहीं की गई। जब केंद्र प्रभारी संजय निरंजन से इस बारे में बात की गई कि गेहूं किसका है तो उन्होंने बताया कि एक बड़े कास्तकार का गेहूं है, वह अभी आ रहे हैं। पंजीकरण के बारे में जानकारी करने पर भी उन्होंने यही बात दोहराई।
एक ओर जहां नियमों के फेर के चलते किसान मंडी में गेहूं बेचने के लिए मजबूर हैं, वहीं केंद्र प्रभारी की यह दरियादिली कि बिना पंजीकरण और कागज के ही सीधे गेहूं की तौल करा दी।
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पीसीएफ के केंद्र पर गेहूं रखने की जगह ही नहीं
मंडी स्थित पीसीएफ के क्रय केंद्र पर भी हाल कुछ ऐसा ही था। पड़ताल के दौरान जब केंद्र प्रभारी ज्ञानेंद्र तिवारी से एक किसान की तरह गेहूं विक्रय को लेकर बात की गई तो उन्होंने साफ इन्कार कर दिया। उन्होंने बताया कि उनके पास गेहूं रखने के लिए जगह ही नहीं है। जब तक खरीदा गया गेहूं गोदाम में नहीं जाता, तब तक वह गेहूं नहीं खरीद पाएंगे।
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नियमानुसार ही गेहूं की खरीद करने के निर्देश दिए गए हैं। अगर कोई केंद्र प्रभारी बिना छनाई आदि के गेहूं खरीदेगा तो उसे खुद ही भुगतना होगा। ऑडिट के दौरान गेहूं खराब निकलने पर केंद्र प्रभारी से ही इसकी कटौती की जाएगी। साथ ही केंद्र पर गड़बड़ी की जांच भी कराई जाएगी।
-बृजेश कुमार, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी।
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फोटो-32-मंडी स्थित खाद्य विभाग के क्रय केंद्र पर सीधे बोरों में गेहूं पलटते मजदूर। संवाद- फोटो : बोधि वृक्ष के नीचे भगवान बुद्ध की पूजा करते बौद्ध अनुयायी।