संवाद न्यूज एजेंसी
बिधूना। रविवार दोपहर क्षेत्र के चार गांवों की लगभग 50 बीघा खेत में गेहूं की फसल में आग लग गई। घटना की जानकारी पुलिस को दी गई। मौके पर पहुंचे दमकलकर्मियों ने ग्रामीणों की मदद से एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। पीडि़त किसानों ने आर्थिक मदद की मांग की है।
गर्मी दस्तक हो चुकी है। गेहूं की फसल भी पक चुकी है। अधिकांश खेतों में किसानों ने कटाई भी शुरू कर दी है। रविवार की दोपहर लगभग एक बजे कुदरकोट थाना क्षेत्र के गांव हिन्नापुर व आस-पास के गांव कलारपुर, अचानकपुर, पीरापुरा में खेत में खड़ी गेंहू की फसल में अचानक आग लग गई। खेतों से उठती आग की लपटों को देख राहगीरों ने खेत मालिकों व पुलिस को सूचना दी।
फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे कुदरकोट थानाध्यक्ष पूजा सोलंकी ने घटना की जानकारी दमकल विभाग को दी। मौके पर दो गाड़ियों के साथ पहुंचे दमकलकर्मियों ने ग्रामीणों की मदद से लगभग एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक फसल जलकर राख हो चुकी थी। आग से कलारपुर निवासी जयराम सिंह व उनकी पत्नी अन्नपूर्णा की सबसे अधिक 23 बीघा व इसी गांव के अन्य ग्रामीण अनिल कुमार, मुकेश, रामकुमार, श्रीकृष्ण शंखवार, जिलेदार पुत्र सिंगू की फसल जलकर राख हुई।
अचानकपुर गांव में देवेंद्र यादव पुत्र बदन सिंह, पीसापुरा ऊसराहाल में रामपति पति हरनारायण सिंह फसल जलकर राख हुई है। ग्रामीणों की सूचना पर तहसीलदार रनवीर सिंह, नायब तहसीलदार हरिकिशोर, लेखपाल सुधीर, अनमोल आदि मौके पर पहुंचे। साथ ही आग से नष्ट हुई फसल का आकलन शुरू किया गया।
तहसीलदार रनवीर सिंह ने बताया कि किसान 30-35 बीघा फसल जल जाने की बात कह रहे हैं। आकलन पूरा हो जाने के बाद नुकसान की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। उधर उप जिलाधिकरी बिधूना हरिशचंद्र ने बताया कि आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है। आकलन के बाद पीड़ित किसानों को मुआवजा दिलाया जाएगा।
कहीं किसी की शरारत तो नहीं.....
रविवार दोपहर एक बजे के करीब हुई गेहूं की फसल में आग की घटना पर एक घंटे में काबू पा लिया गया, लेकिन आग बुझाने के बाद ध्यान आग लगने के कारण पर गया तो सवाल खड़े हुए। इस क्षेत्र में आग लगी वहां बिजली की लाइनें नहीं थी। ऐसे में आग लगने की वजह के पीछे किसी की शरारत भी हो सकती है। इसे देखते हुए पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी किसानों व ग्रामीणों से पूछताछ करते रहे।
आग लगने के पीछे का कारण तलाशा जाता रहा। वहीं तमाम तरह की चर्चाएं भी होती रहीं। लपटें उठती देख किसान आग पर काबू पाने के लिए मशक्कत कर रहे थे। वहीं मेहनत व लागत जुटाकर तैयार की गई फसल को जलता देख नम आंखों से वह अपने अरमान भी जलते देख रहे थे। जिन किसानों की फसल जली उन्हें ढांढस बंधाने के लिए पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी मुआवजे का दिलासा देते नजर आए।
जयराम सिंह के परिवार में कुल 23 बीघा फसल जली
आग की घटना को लेकर तहसील स्तर से किए जा रहे आकलन कार्य को कर रहे क्षेत्रीय लेखपाल अनमोल ने बताया कि जयराम व उनकी पत्नी अन्नपूर्णा उर्फ मंजू के नाम कुल 30 बीघा जमीन है। जिसमें से 23 बीघा खेत में गेहूं की फसल बोई गई थी जोकि जलकर राख हो गई है। वहीं सात बीघा के अन्य खेत में सरसों की फसल बोई गई थी जो कुछ दिन पहले कट गई थी।