रुरुगंज। एरवाकटरा ब्लाॅक के मनीकोठी पतियात व नूराबाद खास गांव में प्रधान और सचिव पंचायत भवन में नहीं बैठते। लाखों की लागत से बना ग्राम सचिवालय भवन शोपीस साबित हो रहा है। यहां अक्सर ताला लगा रहता है।
ग्राम पंचायत सचिवालय बनवाने के पीछे सरकार का उद्देश्य था कि गांव के लोगों को आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर की नकल आदि के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। प्रधान व सचिव सचिवालय में बैठकर ग्रामीणों की समस्याओं का निस्तारण करेंगे। इसके लिए पांच साल पहले करीब 10 लाख की लागत से पंचायत सचिवालय बनवाया गया था।
समाजसेवी उपेंद्र यादव, योगेंद्र कुमार, कल्लू सविता, रिंकू कुमार, हिमांशु यादव बाबा ने बताया कि सचिव की तलाश में ब्लाॅक में भटकते हैं। मौजूदा समय में सचिवालय में न प्रधान बैठते हैं और न ही सचिव। बीडीओ संजीव पांडेय ने बताया कि सचिवालय बंद होने की जानकारी नहीं है। अगर इसे नहीं खोला जाता है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।