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Auraiya News: अस्पतालों में तारों का मकड़जाल, बदहाल पड़े अग्नि सुरक्षा के इंतजाम

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औरैया। झांसी में अस्पताल में आग लगने से 12 बच्चों की मौत के बाद स्वास्थ्य महकमा व दमकल विभाग की नींद खुली है। दमकल विभाग की ओर से जहां अस्पतालों में लोगों को आग की घटनाओं के संबंध में जागरूक किया जा रहा हैं। वहीं, चूक वाले बिंदुओं के संबंध में विशेष ध्यान देने की सलाह दी जा रही है। दूसरी तरफ शहर से लेकर चिचौली स्थित 100 शैया जिला अस्पताल की बिल्डिंग में कई जगह खुले तारों का मकड़जाल कभी भी हादसे का सबब बन सकता है। फायर सेफ्टी तंत्र भी खराब पड़े हुए हैं। अब शासन स्तर से 20 बिंदुओं पर मांगी गई रिपोर्ट के बाद अंडरग्राउंड वायरिंग व फायर सेफ्टी तंत्र को लेकर सुध ली गई है। इस संबंध में अब पत्राचार होंगे। ऐसे में उम्मीद जगी है कि व्यवस्थाएं पटरी पर आएंगी।
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सीन-01
फोटो-19एयूआरपी 18- 50 शैया युक्त अस्पताल में बिजली सप्लाई के मुख्य चेंबर में तारों का मकड़जाल व चढ़ी धूल। संवाद
फोटो-19एयूआरपी 19- कक्षों के बाहर लगी एसी को जाते खुले में बिजली के तार। संवाद
फोटो-19एयूआरपी 20- दवा स्टोर कक्ष में लगी एसी के खुले पड़े तार। संवाद
एसी से लेकर मुख्य बिजली सप्लाई चेंबर तक खतरा
औरैया शहर के 50 शैया जिला अस्पताल में तारों का मकड़जाल है। कक्षों में लगी एसी से लेकर मुख्य बिजली सप्लाई चेंबर उलझे तारों की चपेट में है, जिससे खतरा बरकरार है। तारों की स्पार्किंग हादसों को दावत दे सकती है। शहर स्थित जिला अस्पताल में आग की घटनाओं पर काबू पाने के लिए महज फायर स्टिंग्यूशर हैं, जबकि यहां पर फायर सेफ्टी तंत्र लगा होना चाहिए। बता दें साल दर साल ऑडिट होने के दौरान इन खामियों का जिक्र होता है, लेकिन सुधार को लेकर अभी तक कोई प्रयास देखने को नहीं मिला है। इमरजेंसी की बिल्डिंग में कक्षों के बाहर लगी एसी के आसपास तारों का मकड़जाल छाया हुआ है। वहीं मुख्य सप्लाई का चेंबर में बुरी तरह से उलझे तारों में स्पार्किंग हुई तो आग की घटना हो सकती है।

सीन-02)
फोटो-19एयूआरपी 21- 100 शैया जिला अस्पताल में बिना सप्लाई पाइप के धूल खाता फायर सेफ्टी तंत्र का बॉक्स। संवाद
फोटो-19एयूआरपी 22- पुराने एनआरसी बार्ड के सामने दीवाल पर खुले पड़े बिजली के बोर्ड में उलझे तार। संवाद
तीन करोड़ से दूर होगी फायर और जर्जर बिजली लाइन समस्या
चिचौली स्थित 100 शैया जिला अस्पताल में बिल्डिंग बनने के दौरान फायर सेफ्टी तंत्र भी लगाया गया, लेकिन समय के साथ ही देखरेख के अभाव में फायर सेफ्टी तंत्र खराब हो गया। यहां पर बिल्डिंग में अंडरग्राउंड वायरिंग है। इसके बावजूद कई जगह बिजली के बोर्ड खुले हुए हैं। महज फायर एस्टिंग्यूसर हैं आग पर काबू पाने के लिए। 100 शैया जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि बिजली के तारों की अंडरग्राउंड वायरिंग व फायर सेफ्टी को लेकर तीन करोड़ का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है।
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सीन-03)
फोटो-19एयूआरपी 23- अछल्दा सीएचसी की बिल्डिंग में लगा खराब पड़ा फायर नियंत्रण सिस्टम। संवाद
खराब पड़ा फायर सेफ्टी सिस्टम
अछल्दा सीएचसी में रोजाना 300 के करीब मरीज पहुंचते हैं। यहां पर बिल्डिंग निर्माण के दौरान फायर सेफ्टी सिस्टम लगाया गया था, लेकिन देखरेख के अभाव में यह सिस्टम खराब हो गया। 20 बिंदुओं पर मांगी गई रिपोर्ट में इस सिस्टम के संवरने की संभावना बढ़ गई है, जबकि साल दर साल ऑडिट के दौरान खराब पड़े फायर सेफ्टी सिस्टम की रिपोर्ट भेजी जाती है। हालांकि, फायर सिलिंडर उपलब्ध हैं।
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सीन-04)
फोटो-19एयूआरपी 24- बिजली सप्लाई के चेंबर समीप रखी गत्तों में सामग्री। संवाद
हालात जस के तस
पिछले दिनों दमकल विभाग की ओर से बिधूना कस्बा के मातृ एंव शिशु अस्पताल में आग की घटनाओं को लेकर जागरूकता कार्यक्रम व चूक के बिंदुओं को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। इसमें बिजली सप्लाई चेंबर के आसपास आग लगने से संभावित सामग्री न रखे जाने को लेकर कुछ गत्तों को हटाने के लिए कहा गया। मंगलवार को हालात जस के तस नजर आए। बिजली सप्लाई चेंबर के पास गत्तों का यह सामान रखा रहा।

सीन-05)
सीएचसी पर सिर्फ फायर स्टिंग्यूशर
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अजीतमल में आग से निपटने के लिए सिर्फ फायर स्टिंग्यूशर ही लगे हैं। दमकल विभाग द्वारा समय-समय पर सामूहिक रूप से लोगों को जानकारी भी उपलब्ध कराई जाती है। वहीं, आग जैसी घटना होने पर मेन स्विच ऑफ कर देने के बाद लगे इन्वर्टर से लाइट सिस्टम चालू हो सकता है। इसके लिए परिसर में दो जगह इन्वर्टर लगे हुए हैं, जिससे इमरजेंसी लाइट दी जा सकती है। इस संबंध में सीएचसी अधीक्षक डॉ. अवनीश कुमार ने बताया कि फायर सिलिंडर चलाने के लिए कोई नामित व्यक्ति नहीं है। परिसर में फायर स्टिंग्यूशर के अलावा और कोई आग बुझाने की सुविधा नहीं है।
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