उत्तर भारत में कमजोर मानसून की भविष्यवाणी का असर अभी से जिले की माटी पर भी दिखने लगा है। चारों ओर से पानी की आवाजें उठने लगी हैं।
ऐसे में सिंचाई विभाग के पास उपलब्धता के सापेक्ष 36 क्यूसिक पानी की कमी खरीफ सीजन की फसलों के लिए संकट का सबब बनने वाली हैं। समय से बारिश न हुई तो धान किसान नर्सरी के लिए भी तरस जाएंगे।
नहरें भी पानी मांगेगी। ऐेसे में बढ़े तापमान से नीचे गिरे भूगर्भ जल स्तर से पानी छोड़ रहे सरकारी नलकूप भी किसानों को निराश कर सकते हैं।
जिले के कुल क्षेत्रफल दो लाख 652 हेक्टेअर में कृषि योग्य 1627.15 वर्ग किलोमीटर में 1193.55 वर्ग किलोमीटर सिंचित क्षेत्र में आता है। इस सिंचित क्षेत्र में पानी उपलब्धता की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग की है। सिंचाई विभाग नहरों के माध्यम से किसानों को सिंचाई के लिए पानी आपूर्ति करता है।
पिछले सत्र की तरह इस सत्र में मौसम वैज्ञानिक मानसून कमजोर होने की आशंका जता रहे हैं। पानी की उपलब्धता और खेतों की प्यास का असर इस बार अभी से सिंचाई विभाग पर दिखाई दे रहा है।
जिले में किसानों की 516 क्यूसिक पानी की मांग के सापेक्ष 36 क्यूसिक पानी सिंचाई विभाग के पास नहीं है। मौजूदा समय में सिंचाई विभाग के पास 480 क्यूसिक पानी ही मौजूद है, जो राम गंगा कमांड, पौढ़ी गढ़वाल डेम से उपलब्ध कराया जाएगा।
गंगा नदी पर कोई डेम न होने से विभाग की उम्मीदें पौढ़ी गढ़वाल के डेम पर टिकी हुई है। ऐसे में पानी की कमी इस बार के खरीफ फसली चक्र को प्रभावित कर दे, इस चिंता से किसान हलाकान हैं।
अभी तक हुई जीरो एमएम वर्षा - औरैया। इस बार जिले में सूखे की संभावना इसलिए और बनती दिख रही है कि गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष के जून माह में अब तक बारिश का न होना है। सूखे के संक्रमण से जकड़े रहे खरीफ सीजन 2014 में 11 मिमीमीटर तो खरीफ सीजन 2013 के जून माह में 217.5 मिमी. बारिश हुई थी।
नर्मदा नदी से निकली समानांतर निचली गंगा नहर डेम की क्षमता 2200 से बढ़ाकर 4200 क्यूसिक हो गई है। पिछले सालों में इस डेम से जिले को पानी मिला था। इस बार भी पानी की कमी को इसी डेम से पूरा किया जाएगा। इसके लिए विभाग से वार्ता का दौर जारी है। रजनीकांत, एक्सईएन, सिंचाई