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अनदेखी से पेयजल समस्या से जूझ रही तीन गांवों की 5802 की आबादी

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औरैया। बिधूना ब्लॉक के तीन गांवों की करीब छह हजार आबादी पेयजल संकट से जूझ रही है। इन गांवों में टंकियां शोपीस बनीं हैं। हाल ये है कि हैंडपंप खराब होने पर लोग पानी के लिए भटकते फिरते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत की गई लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
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बिधूना क्षेत्र के गांव लाखी, जौहर व बर्रूकुलासर में 2009 में बनाई गईं पानी की टंकियां जर्जर हो गईं हैं। लाखी की आबादी 1868 हैं। यहां बनी टंकी सही रखरखाव न होने से 2010 में ही खराब हो गई। ग्राम पंचायत जौहर की आबादी 1584 है। पानी न मिल पाना इस गांव की मूल समस्या है। 2009 में पानी की टंकी बनवाई गई थी लेकिन कुछ ही समय बाद ही खराब हो गई। आज तक ठीक नहीं कराई गई। बर्रूकुलासर गांव की आबादी 2350 है। यहां पुरानी टंकी देखरेख के अभाव में बंद पड़ी है। अब रिबोर के बाद ही उसके चालू होने की संभावना है। पंचायत में लगे तीन वाटर कूलर में एक खराब है।
ग्रामीणों ने बताई समस्या
लाखी निवासी संतोष कुमार ने बताया कि 2009 में पानी की टंकी बनाई गई थी लेकिन पानी नसीब नहीं हुआ। दो वाटर कूलर बमहनौटी व रज्जापुरवा में लगाए गए थे। ये भी खराब पड़े हैं। गांव में लगे चार हैंडपंप ही सहारा हैं। हैंडपंप खराब होने पर समस्या और गंभीर हो जाती है।
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जौहर गांव निवासी जिलेदार ने बताया कि तीन नलों से खारा पानी आता है। जलस्तर कम होने से टंकी से पूरे गांव में पानी नहीं पहुंचता है। पंचायत के मजरा भवानीपुर व पंडपुर में पाइप लाइन तो बिछाई गई लेकिन पानी नहीं पहुंचा। पंचायत में लगे दोनों वाटर कूलर खराब पड़े है।
बर्रूकुलासर-ढिपारा गांव निवासी राधेश्याम ने बताया कि गांव के लोग स्वच्छ पानी को वर्षों से तरस रहे हैं। उनके घर के बाहर लगा वाटर कूलर खराब पड़ा है। जिसको सही कराने के लिए कई बार पंचायत सचिव से कहा लेकिन स्थिति जस की तस है।
बर्रूकुलासर, जौहर व लाखी गांव के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था। लेकिन इस्टीमेट में कुछ खामियों के कारण प्रस्ताव वापस भेज दिया गया है। जल्द ही सुधार करके इसे पुन: भेजा जाएगा। - विवेक कुमार, जेई जल निगम।
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