अहिंसा यात्रा गुरूवार को सुबह नगर में पहुंची। अजीतमल-बाबरपुर नगर पंचायत अध्यक्ष अशोक चक ने अहिंसा यात्रा का स्वागत किया। अहिंसा यात्रा का नगर के श्रीजनता इंटर कालेज में एक दिन का प्रवास है।
इस मौके पर विद्यालय के प्रधानाचार्य कृष्णमोहन उपाध्याय, शिक्षक शिव दुबे, सुधीर दुबे आदि ने पूजन कर अहिंसा यात्रा का स्वागत किया। इस अवसर पर आचार्य श्री महाश्रमण ने कहा कि देश की शांति के लिए सभी को आपस में सद्भावना बनाकर रहना चाहिए।
कहा कि किसी भी राष्ट्र, समाज और परिवार की उन्नति और शांति के लिए पारस्परिक सद्भाव अपेक्षित होता है। सद्भाव के अभाव में अहिंसा जीवन व्यवहार में प्रतिष्ठित नहीं हो सकती। पारस्परिक टकराव आपसी दूरियां ही नहीं बढ़ाता अपितु वह कितनाें के लिए घातक बन जाता है।
जाति, भाषा, वर्ण व क्षेत्र का दुराग्रह, सांप्रदायिक उन्माद, तुच्छ स्वार्थवृत्ति और विकृत मानसिकता पारस्परिक सद्भाव न होने के कारण बनते हैं। उन्होंने अहिंसा यात्रा का उद्देश्य बताते हुए कहा कि सद्भावना का प्रसार, नैतिकता का प्रचार-प्रसार और नशा मुक्ति अभियान तीन उद्देश्य हैं, जिनसे मैत्री का दीप जल सकता है।
अहिंसा यात्रा के साथ चल रहे मुनि दिनेश जी ने बताया कि अहिंसा यात्रा का मुख्य उद्देश्य सद्भावना, नैतिकता, नशा मुक्ति है। यात्रा का शुभारंभ दिल्ली से नौ नवंबर 2014 को हुआ। यह यात्रा भारत के विभिन्न प्रांतों और अन्य देशों में इंसानियत की ज्योति प्रज्ज्वलित कर रही है।
अभी तक यह यात्रा 30 हजार किलोमीटर का रास्ता तय कर चुकी है। अब 10 हजार किलोमीटर का लक्ष्य और रखा गया है, जिसे पूरा करना है। यात्रा के साथ करीब 90 साधु एवं साध्वी चल रहे हैं। साथ ही सैकड़ाें की संख्या में देशभर से आए अनुयायी हैं।
पदयात्रा प्रतिदिन 12 से 15 किलोमीटर की दूरी तय करती है, जहां यात्रा का विश्राम होता है, वहां आचार्य श्री महाश्रमण जी द्वारा लोगों को ज्ञान का पाठ पढ़ाया जाता है।
यात्रा का संकल्प- मैं सद्भावपूर्ण व्यवहार करने का प्रयत्न करूंगा। मैं यथासंभव ईमानदारी का पालन करूंगा। मैं नशामुक्त जीवन जीऊंगा।