यातायात पुलिस की अनदेखी और शहरवासियों की मनमानी सब पर भारी पड़ती नजर आ रही है। विभागीय लापरवाही के चलते जिले में गिने-चुने लोग ही हेलमेट लगाए दिखाई देते हैं। हेलमेट न लगाने से कई लोगों की जानें जा चुकी हैं। वहीं हेलमेट लगाने से कई लोगों की जानें बची भी हैं। हम सबको संकल्प लेना चाहिए कि हेलमेट लगाए बिना घर से बाहर नहीं निकलेंगे।
शहर के ब्रहमनगर मोहल्ला निवासी मुन्नाला अग्निहोत्री का कहना है कि हेलमेट लगाने से कई फायदे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष 2014 में उनका गाजियाबाद में एक्सीडेंट हो गया था, लेकिन हेलमेट लगाए होने के कारण उनकी जान बच गई। उन्होंने बताया कि उस दिन अगर वह हेलमेट न लगाए होते उनकी जान जा सकती थी।
यातायात नियमों का पालन करना हमारा कर्तव्य है और हमारी सुरक्षा भी। उन्होंने बताया कि 2009 में कानपुर जाते समय वह हाइवे पर डिवाइडर की चपेट में आ गए थे। सिर पर हेलमेट होने के कारण सिर तो बच गया था, लेकिन हाथ व एक पैर की हड्डी टूट गई थी। उन्हें ठीक होने में छह माह का समय लगा।अब तो वह शहर के अंदर भी हेलमेट लगाकर चलते हैं।
बाइक पर हेलमेट लटका कर सफर करना मेरी आदत थी। खानपुर के पास हाइवे से नीचे से होते हुए वह मुरादगंज जा रहे थे। तभी सामने चल रहे बाइक सवार को साइड से मैजिक ने टक्कर मार दी। उनकी आंखों के सामने बाइक सवार का सिर रिक्शे की धुरी से टकरा गया। तब से आज तक मैं बिना हेलमेट के कभी हाइवे पर नहीं निकलता हूं।
पंचायत चुनाव खत्म होने के बाद जिले में अभियान छेड़ा जाएगा। लोगों को हेलमेट पहनने के लिए जागरूक किया जाएगा। चालान की बजाए उन्हें हेलमेट खरीदने की सलाह दी जाएगी।
माया प्रसाद यादव
यातायात प्रभारी