औरैया। जिले में टीबी मरीजों के पौष्टिक आहार और आर्थिक सहायता के लिए केंद्र सरकार की निक्षय पोषण योजना का लाभ टीबी मरीजों को समय पर नहीं मिल पा रहा है। जिले में वर्तमान में करीब दो हजार नोटिफाइड टीबी मरीज प्रोत्साहन राशि के इंतजार में हैं। पुराने ठीक हो चुके मरीजों को शामिल करें तो यह संख्या दो हजार के पार पहुंच जाती है।
शासन स्तर से इन मरीजों को प्रोत्साहन राशि देने के लिए बायोमीट्रिक की अनिवार्यता कर दी गई है। इसके लिए प्रत्येक मरीज का बायोमीट्रिक कराया जा रहा है। पिछले कुछ माह से टीबी मरीजों की प्रोत्साहन राशि अटकी हुई है। बायोमीट्रिक के अभाव में हाल के महीनों में मरीजों को लाभ नहीं मिल सका है। जिले के टीबी केंद्र पर मरीजों की आभा आईडी लिंक करने का काम चल रहा है, लेकिन पोर्टल धीमा होने और बायोमीट्रिक मिलान नहीं होने जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।
ई-केवाईसी प्रक्रिया में मरीज का फोटो और रेटिना स्कैन किया जाता है, लेकिन कई मरीजों का रेटिना स्कैन नहीं हो पा रहा है। ऐसे में उन्हें आधार केंद्र जाकर बायोमीट्रिक अपडेट कराने के लिए कहा जा रहा है। ई-केवाईसी में फिंगरप्रिंट का विकल्प न होने से भी परेशानी बढ़ी है। समस्या यहीं तक नहीं है। चिचौली स्थित टीबी केंद्र पर नेटवर्क की समस्या है। कभी-कभार नेटवर्क होने के बाद सर्वर न आने से पोर्टल काम नहीं करता है। ऐसे में केंद्र पर पहुंचने वाले मरीजों का काम नहीं हो पाता है।
यह है निक्षय पोषण योजना
इस योजना के तहत टीबी मरीजों को इलाज के दौरान हर महीने एक हजार रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता दी जाती है, ताकि वे अपनी खुराक में पौष्टिक आहार (जैसे दूध, फल, प्रोटीन) शामिल कर सकें और दवाओं का शरीर पर बेहतर असर हो सके। यह राशि इलाज चलने के छह माह तक दी जाती है। इसी योजना के अंतर्गत पोषण पोटली भी वितरित होती हैं, जिसके लिए कोई बजट नहीं होता। ये दानदाताओं के जरिये बंटवाई जाती हैं।
वर्जन
नए आदेशों के क्रम में पहले टीबी मरीजों की आभा आईडी लिंक व ई-केवाईसी प्रक्रिया को पूर्ण कराया जा रहा है। बायोमीट्रिक भी चल रहा है। जिसके बाद उन्हें राशि उपलब्ध करा दी जाएगी।
-रविभान, कोर्डीनेटर, टीबी मुक्त अभियान