औरैया। ब्लॉक भाग्यनगर में फर्जी सीएलएफ बनाकर 16.71 लाख रुपये के फर्जीवाड़े के मामले में जिम्मेदार कार्रवाई को लेकर लापरवाह बने हुए हैं।
यही कारण है कि मामला सामने आने के करीब 20 दिन बाद भी आरोपियों पर एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी है। उच्चाधिकारियों के आदेश के बाद भी एक पखवाड़े से जिम्मेदार एक दूसरे के पाले में गेंद फेंक रहे हैं।
नवंबर के अंतिम सप्ताह में इस फर्जीवाड़े की जानकारी अधिकारियों को लगी थी। इसके बाद डीसी एनआरएलएम ने जांच करते हुए अपनी रिपोर्ट दी थी। इसमें फर्जी संकुल स्तरीय संघ में अध्यक्ष पूनम डेविड, सचिव प्रीती और खाता संचालनकर्ता संध्या के साथ ही ब्लॉक मिशन मैनेजर संकल्प तिवारी की संलिप्तता साबित हुई थी।
तीनों महिलाएं जहां सीएलफ (संकुल स्तरीय संघ) में पदाधिकारी होने के कारण दोषी थीं तो वहीं बीएमएम संकल्प का पत्र बैंक में खाता खोलने के लिए जमा कराया गया था। इसी आधार पर मुख्य विकास अधिकारी संत कुमार ने मामले में दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने के आदेश बीडीओ भाग्यनगर आदित्य तिवारी को दिए थे।
इस आदेश को करीब एक पखवाडे यानी 15 दिन से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अब तक एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी। उल्टा बीडीओ ने मामला अपने पाले से उठाकर डीसी एनआरएलएम पर डालते हुए उन्हें एफआईआर दर्ज कराने के लिए वापस उच्चाधिकारियों को पत्र भेज दिया। ऐसे में यह मामला टलता जा रहा है। दूसरी तरफ दोषी इसका फायदा उठा रहे हैं।
अन्य ब्लॉकों और समूहों की जांच कराना जरूरी
भाग्यनगर ब्लॉक में अधिकारियों की नाक के नीचे इतना बड़ा फर्जीवाड़ा हो गया और किसी को कानों-कान खबर नहीं लगी। ऐसे में अन्य ब्लॉकों में भी गड़बड़ी की आशंका प्रबल हो गई है। विभाग को जल्द ही अन्य ब्लॉकों की भी जांच करानी होगी, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके कि कहीं और तो यह खेल नहीं चल रहा है।
फर्जी सीएलएफ बनाकर घपला करने के मामले में एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए गए हैं। देरी क्यों हो रही है, इसकी जानकारी की जाएगी। जिस स्तर से भी एफआईआर करानी होगी, कराई जाएगी। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
-संत कुमार, मुख्य विकास अधिकारी।