औरैया। खेतीबाड़ी में सहकारी समितियां किसानों की मददगार होती हैं। यहां रियायती ऋण पर समय से किसानों को खाद मुहैया हो जाती है, लेकिन सालों से जिले में तीन समितियों पर ताला जड़ा हुआ है।
अब इन्हें दोबारा से मार्च में शुरू कराया जाएगा। इसके लिए सहकारिता विभाग ने कागजी कवायद पूरी कर ली है। नए सिरे से जीएसटी रजिस्ट्रेशन व अन्य काम पूरे कर लिए गए हैं।
बीहड़ में खाद की उपलब्धता के लिए किसानों को प्राइवेट दुकानों पर निर्भर रहना पड़ता है। किसानों को खाद के लिए अजीतमल, मुरादगंज व औरैया तक भागदौड़ करनी पड़ती है। वहीं पिछले 10 सालों से बीहड़ में तीन समितियां बंद पड़ी हैं। जिले में वर्तमान समय में 79 सहकारी समितियां हैं, इनमें से 76 समितियों पर किसानों को रियायती ऋण पर खाद मुहैया कराई जा रही है।
सहकारिता विभाग की ओर से पिछले डेढ़ साल में जिले में निष्कि्रय 12 समितियों के ताले खोले गए हैं। इसके बावजूद बीहड़ क्षेत्र की तीन सहकारी समितियों के ताले अभी तक नहीं खुल सके हैं। ऋण वसूली न होने की वजह से यह समितियां घाटे में चली गई थीं।
ऐसे में बीहड़ के किसानों को खाद के लिए भटकना पड़ रहा है। इन समितियों में भूरेपुर कलां की बड़ेरा, अयाना व सेंगनपुर शामिल हैं। इन समितियों से तकरीबन चार हजार किसान जुड़े हुए हैं। विभाग की ओर से इन समितियों को शुरू कराने के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन से लेकर अन्य कागजी प्रकि्रया पूरी कर ली गई है। अब बैंक से धन आवंटन के साथ ही सचिवों की तैनाती होनी बाकी है। अब विभाग मार्च में इन समितियों पर खाद वितरण शुरू कराने के लिए तैयारी कर रहा है।
अजीतमल जाना पड़ता
फसल के लिए खाद की जरूरत होने पर अजीतमल जाना पड़ता है। करीब 13 किलोमीटर दूर से खाद लानी पड़ती है। ऐसे में भाड़ा भी लगता है।-जयपाल, भूरेपुर कलां गांव
परेशान होना पड़ रहा
काफी दिनों से सहकारी समिति को दोबारा शुरू कराने की मांग कर रहे हैं। अधिकारी कागजी प्रकि्रया जारी होने का हवाला दे रहे हैं। खाद के लिए परेशान होना पड़ता है।-शिवकिशोर, बड़ेरा गांव
वर्जन
अजीतमल क्षेत्र के बीहड़ की तीन समितियों को शुरू कराने के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन करा दिया गया है। अब इसे चालू कराने के लिए बैंक से अनुबंध कराया जा रहा है। मार्च में तीनों समितियों को चालू करा दिया जाएगा।- संजीव कुमार, एआर कोऑपरेटिव
फोटो-1- बंद पड़ी भूरेपुर कला स्थित सहकारी समिति। संवाद
फोटो-1- बंद पड़ी भूरेपुर कला स्थित सहकारी समिति। संवाद