औरैया। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए मेडिकल कॉलेज तो बना है लेकिन वहां पर एमआरआई जांच की सुविधा नही हैं। अगर किसी भी मरीज को एमआरआई की जांच करानी है, तो उसे यहां से 100 किमी दूर कानपुर तक सफर करना पड़ रहा है। यही हाल सरकारी का भी है। प्राइवेट में यह जांच कराने पर उन्हें पांच हजार से ज्यादा का खर्चा भी उठाना पड़ रहा है। बता दें कि एमआरआई जांच के लिए डॉक्टर मरीज को तब लिखते हैं जब एक्सरे व सीटी स्कैन में उन्हें जरूरी जानकारी समझ नहीं आती है क्योंकि एमआरआई जांच शरीर के अंदर की बारीकी जांच कर देती है।
शहर में जहां 50 शैया जिला अस्पताल है तो वहीं चिचौली में मेडिकल कॉलेज है। इसके अलावा जनपद में आठ सीएचसी भी हैं। पर हाल यह है कि कहीं भी एमआरआई जांच की सुविधा नहीं है। मजबूर होकर जिले के मरीजों को प्राइवेट में या फिर कानपुर जाकर इस जांच को करानी पड़ती है। डॉ. पवन कुमार बताते हैं कि एमआरआई जांच से शरीर के आंतरिक अंगों के अदरुनी हिस्सों की जांच की जाती है। मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी, यहां तक कि तंत्रिका संबंधी रोगों का पता चलता है। मांसपेशियों की चोटों को भी पता कर लिया जाता है। ये एक्स-रे में नहीं आती हैं। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मुकेश वीर सिंह ने बताया कि एमआरआई जांच की सुविधा देने के लिए शासन में पत्राचार किया जा रहा है। जल्द ही इस सुविधा को शुरू कराया जाएगा।
दो हजार से ज्यादा है मेडिकल कॉलेज की ओपीडी
चिचौली स्थित मेडिकल कॉलेज में रोजाना दो हजार से ज्यादा मरीज पहुंचते हैं। सेंट्रल लैब में 600 से ज्यादा मरीजों की जांच की जाती है। एक्सरे व सीटी स्कैन कराने वालों की संख्या भी 100 के पार रहती है।