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Auraiya News: शीशे में छेद तो किसी में दरार, सर्द हवा के थपेड़े झेलते यात्री

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यूपी 79 टी 4769 नंबर वाली रोडवेज बस के शीशों में दरार व लगी पालीथीन। - फोटो : यूपी 79 टी 4769 नंबर वाली रोडवेज बस के शीशों में दरार व लगी पालीथीन।
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औरैया। रोडवेज डिपो की बसों की हालत खस्ताहाल है। किसी बस के शीशे में छेद है तो खिड़कियों के शीशों में दरारें हैं। बसों में ये खामियां सर्द मौसम में सफर के दौरान मुसाफिरों की परेशानी बढ़ा रही हैं। चलती बस में हवाओं से यात्री सिरह उठते हैं। सफर के दौरान यात्री एक हाथ से शीशे को दाबते हैं, तो कहीं शीशे की दरार को बंद करने के लिए पॉलीथीन लगाते हैं। इस कारण मुसाफिरों को सफर में दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है।
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शुक्रवार को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने बसों की पड़ताल की। टीम को बसों में खामियां मिलीं। टीम ने औरैया डिपो की 10 बसों की जांच की, चार बसों के शीशे ढीले और उनके बीच दरार मिली। अधिकांश बसों के शीशों के बीच में छोटे छेद दिखे।
औरैया डिपो में मौजूद 70 बसों को विभिन्न रूटों पर संचालित किया जाता है। इन बसों को दुरूस्त करने के निर्देश एक माह पहले ही दिए जा चुके हैं। बता दें कि प्रयागराज में आयोजित होने वाले महाकुंभ के लिए डिपो की 56 बसों को तैयार रखने के निदेश मिले हैं। इसके चलते विभागीय अधिकारियों ने सभी बसों को पूरी तरह फिट कराया था। इसके साथ फॉग लाइटों को लगाने, शीशों को ठीक करने समेत अन्य कमियों को दूर कराया गया था।
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शुक्रवार को बस काफी हद तक फिट मिलीं, लेकिन शीशों की स्थिति अधिकांश बसों में कमजोर रही। चालकों व परिचालकों की माने तो इन दिनों सवारियों की संख्या कम देखने को मिल रही है। बसों को रूट पर जाने से पहले उनकी साफ-सफाई व अन्य चीजों को देखा जाता है। शीशों को भी देखा जाता है, लेकिन सभी शीशों को बारीकी से देखना संभव नहीं हैं।



मौसम को देखते हुए लगभग एक माह पहले ही सभी बसों को पूरी तरह फिट करा दिया गया था। फॉग लाइट लगाने के साथ ही शीशों को भी दुरुस्त कराया गया था। हो सकता है कोई शीशा ढीला हो गया हो। चालकों की जिम्मेदारी है कि डिपो में बस खड़ी करते समय कमियां बताएं। जिससे समय पर ठीक करवाया जा सके। इसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। -अपर्णा मीनाक्षी, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक

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महेवा से सफर कर औरैया पहुंचा हूं। सभी सीटों पर शीशे तो लगे हैं, लेकिन बस के कुछ शीशे ढीले हैं। इससे ठंडी हवा का अहसास करना पड़ रहा है। जिस सीट पर वह बैठा है उसका भी यही हाल है।’ - रोहित, यात्री

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‘जालौन चौराहे से कानपुर जाने के लिए बस में चढ़ा हूं। अभी अधिक दूरी का सफर तय नहीं किया है। शीशा तो है, लेकिन दो शीशों के बीच जगह से ठंडी हवा आ रही है।’- गोलू, यात्री
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