मोहम्मद मुस्तफा के जन्म दिन पर शहर में जोश के साथ जुलूस निकाला गया। इस मौके पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने शिद्दत के साथ शिरकत की। जुलूस के दौरान शांति व्यवस्था के लिए पुलिस प्रशासन की ओर से बेहतर इंतजाम किए गए।
पांच घंटे तक जुलूस शहर के मुख्य मार्गों से होता हुआ गंतव्य पर समाप्त हुआ। रास्ते में जगह-जगह हिंदू समुदाय के लोगों ने सम्मानित लोगों का फूल मालाओं से स्वागत किया।
हजरत मोहम्मद मुस्तफा के जन्म दिन पर शहर में बड़ी शिद्दत, अकीदत के साथ जुलूस निकाला गया। जुलूस की शुरुआत शाह जमालशाह से हुई। यहां से जुलूस उठकर संजय गेट पहुंचा। जहां पर तकिया, बजरिया आदि मोहल्ला से आए जुलूस मिले। इसके बाद जुलूस आगे बढ़ा। संजय गेट से जुलूस बजरिया, गुमटी, लेडीज मार्केट होते हुए सदर बाजार होमगंज पहुंचा।
इस बीच जुलूस का कई जगह स्वागत किया गया। हिंदू समुदाय के लोगों ने भी स्वागत किया। यहां से जुलूस तहसील चौराहा होते हुए ट्रेजरी रोड, दिबियापुर रोड से सुभाष चौक पहुंचा। जहां पर नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि लालजी शुक्ला ने शहर काजी आरिफ रहमानी व समुदाय के अन्य सम्मानित लोगों का स्वागत किया।
इससे पूर्व शहर काजी आरिफ रहमानी ने जुलूस को संबोधित करते हुए कहा कि इंसानियत को जिंदगी देने, कमजोरों का सहारा बनने, असहायों का हक दिलाने, विधवा महिलाओं का सहारा बनकर नवी 20 अप्रैल 5071 इस्वी 12 रवीउल अव्वल पीर के दिन इंसान की शक्ल में आज ही के दिन दुनियां में अवतरित हुए थे।
रहमते आलम रसूले किरदगार ने लोगों को इंसानियत का पाठ पढ़ाया। पैगंबरे इस्लाम जिंदगी मानने वालों के लिए रोशनी की किरण हैं। हम सभी लोगों को इंसानियत के रास्ते पर चलते हुए सदैव लोगों की मदद करनी चाहिए।
इस्लाम ने भी यही फरमाया है कि जो दूसरे की मदद करता है। वह मेरी मदद का सदैव हकदार रहता है। उन्होंने पैगंबर हजरत मोहम्मद मुस्तफा के जन्म दिन की सभी को बधाई दी।