फोटो-14 एयूआरपी 19 मेजर आदित्य त्रिपाठी को नमन करते कविगण। स्रोत, साहित्य भारती
औरैया। रविवार को हिंदी दिवस व मेजर आदित्य त्रिपाठी की जयंती पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें ओज, शृंगार व हास्य रस के कवियों ने अपनी रचनाएं सुनाई और श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। इस दौरान उनकी जमकर तालियां भी बटोरीं।
रविवार को साहित्य भारती सभागार में हुई काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता प्रेम शंकर अवस्थी व संचालन कवि गोपाल पांडेय ने किया। इसमें ओज व वीर रस के हस्ताक्षर अजय अंजाम ने अपनी कविता मेवाड़ विजय के रास्ते में खुद का तन रोड़ा बना दिया, चेतक योद्धा बन गया मुगलों को घोड़ा बना दिया। पर श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाईं। ओज के युवा कवि गोपाल पांडेय ने पढ़ा कि राजनीति मानचित्र बदलना चाहती थी व राष्ट्रहित में पिस्टल की गोली आई काम।
डॉ. गोविंद द्विवेदी ने अपनी कविता सुनाई कि राष्ट्रद्रोह के विरुद्ध शंख नाद कर फिर, एक बार अपनी जवानी जांच लीजिए। कवि अभिषेक तिवारी ने सुनाई, उठ मनुज अब जाग जाओ जग गए सारे परिंदे, कर्म पथ अब निकल कल की राह मत देख बंदे। इसके अलावा उन्होंने हिंदी पर कविता पढ़ी, हिंद का है मान हिंदी, हिंद का अभिमान हिंदी, हिंद से ही ये जहां है, हिंद की है जान हिंदी। पर परिसर तालियों से गूंज उठा। इस मौके पर अनिल पांडेय, किशन मिश्रा ने दिवंगत कवि हरिशंकर मिश्रा की कृतियों व व्यक्तित्व पर चर्चा की।