बिरहुनी गांव में लगा संयंत्र।
- फोटो : परिजन।
अटसू। सरकार बिजली बचाओ अभियान के तहत कचरा से बिजली उत्पादन की योजना चलाए हैं, लेकिन 20 साल पहले बिरहूनी गांव में लाखों के बजट से तैयार संयंत्र उपेक्षा का शिकार है।
यह संयंत्र एनटीपीसी व रिलायंस के सहयोग से तैयार किया गया था। इसे तब एशिया का पहला संयंत्र बताया गया था। वर्ष 2004 -2005 में अजीतमल ब्लाॅक के ग्राम बिरुहनी में कचरे से बिजली बनाने के संयंत्र का निर्माण कराया गया था। इसके पीछे केंद्र सरकार की मंशा थी कि गांव में कूड़ा-कचरा बहुत इकट्ठा हो जाता है। इसका प्रयोग बिजली बनाने में किया जाए। ताकि गांव में बिजली की समस्या से निजात मिल सके।
इसके निर्माण के लिए एनटीपीसी से 60 व रिलायंस से 40 लाख का सहयोग दिया था। इसके निर्माण में उस समय के वरिष्ठ समाजसेवी भगवत स्वरूप विश्नोई की अहम भूमिका रही थी।उस समय गांव के तत्कालीन प्रधान बृजेंद्र सिंह श्रीवास थे। तत्कालीन प्रधान ने बताया कि यह संयंत्र तब एशिया का पहला कूड़े कचरे से बिजली बनाने वाला संयंत्र था।
इस संयंत्र को देखने के लिए दूर दराज से लोग आते थे। यह छह माह अच्छा चला। इससे बिजली आपूर्ति की गई, लेकिन जिला प्रशासन की उपेक्षा से इस पर ग्रहण लग गया। उपकरण चोरी हो गए। ग्रामीणों का कहना हैं कि यदि सरकार व प्रशासन चाहे तो यह पुनः शुरू हो सकता है । इससे क्षेत्र की बिजली समस्या को दूर किया जा सकता है।