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Auraiya News: गणपति बप्पा मोरया के जयकारों के गूंजा पंडाल

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अछल्दा। कस्बा व आस-पास ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित हो रहे गणेश महोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिल रहा है। देर रात तक भक्ति कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे है।
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कस्बा व आस-पास गांव क्षेत्र में घरों और पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की गई है। जहां हर रोज भक्ति कार्यक्रम के साथ ही आरती का आयोजन किया जा रहा है। गुरुवार शाम पूजन के दौरान भक्तों की भीड़ पंडालों में देखने को मिली। जहां गणपति बप्पा मोरया के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया।
कस्बा में हरीगंज बाजार, स्टेशन बाजार, बारिश के बीच पंडाल में सुबह पंडित श्यामकांत पालीवाल ने विधि-विधान से गणेश भगवान की पूजा-अर्चना कराई। इस मौके पर महेश चंद्र कौशल, विष्णु, रोहित, आकाश, राहुल, अर्जुन आदि लोग मौजूद है।
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कृष्ण जन्म होते ही बजी बधाईयां, खुशी में जमकर नाचे भक्त
औरैया। शहर के मोहल्ला बहनटोला स्थित श्री संकट हरण मंदिर पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा में आचार्य पं.अरुण अवस्थी जी महाराज ने श्रोताओं को कृष्णा जन्म की कथा सुनाई। इस दौरान कथा में कृष्ण जन्म का वृतांत शुरू होते ही कथा मंडप में बधाइयां बजने लगीं। खुशी में श्रद्धालु जमकर नाचे।
श्री संकट हरण मंदिर पर आयोजित भागवत कथा में आचार्य पं. अरुण अवस्थी जी महाराज ने कहा कि जब जब धरती पर पाप बढ़ता है, तब तब भगवान किसी न किसी रूप में अवतरित होकर भक्तों का कष्ट दूर करते हैं। कहा कि मथुरा में कंस का अत्याचार चरम स्थिति में पहुंच गया। लोग भगवान को याद कर त्राहि-त्राहि करने लगे। भक्तों की पुकार सुनकर भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में माता देवकी की कोख से जन्म लिया। इस बीच भव्य झांकी प्रस्तुत की गई। इस अवसर पर वासू शुक्ला, आयुष दीक्षित, रानू शुक्ला, देबू शुक्ला, चिंटू शुक्ला, उत्कर्ष शुक्ला, वैभव शुक्ला, शोभित अवस्थी, अमन दुबे, विकास गुप्ता, दिव्यांशु गुप्ता, आनंद गुप्ता के अलावा काफी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। आयोजकों ने भागवत कथा प्रेमियों से संगीतमयी कथा का आनंद लेने की अपील की है। कथा का समापन 15 सितंबर को होगा।
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सुदामा चरित्र की कथा सुन भाव विभोर हुए श्रोता
फफूंद। कस्बा के कटरा मनेपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में आचार्य सतीश ने सुदामा चरित्र की कथा सुनाई। कथा सुनकर श्रद्धालुओं की आंखें भर आईं। सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि संसार में मित्रता श्रीकृष्ण और सुदामा की तरह होनी चाहिए। सुदामा के आने की सूचना मिलने पर श्रीकृष्ण दौड़ते हुए दरवाजे तक गए थे। पानी परात को हाथ छुयो नहिं, नैनन के जल से पग धोए, अर्थात श्रीकृष्ण अपने बाल सखा सुदामा के आगमन पर उनके पैर धोने के लिए पानी मंगवाया। परंतु सुदामा की दुर्दशा को देखकर इतने दुखी हुए कि प्रभु के आंसुओं से ही सुदामा के पैर धुल गए। सुदामा चरित्र की कथा का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए।
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