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जान गईं तब जागे अफसर, गैरजिम्मेदारी पर आश्वासन का पर्दा

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प्रशासन से मिली चेक दिखाती नीलम। संवाद - फोटो : AURAIYA
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औरैया। कंचौसी के ढिकियापुर डेरा में दो बहनों की मौत ने सरकारी सिस्टम की पोल खोल दी। गरीबी, लाचारी भले ही सपना और पूनम की मौत की वजह मानी जा रही हो। इसके पीछे सरकारी सिस्टम भी काफी हद तक जिम्मेदार है। मामला बढ़ा तो मंगलवार सुबह डीएम समेत प्रशासनिक अमला गांव में डेरा जमाकर बैठ गया। अब हर कोई पीड़ित परिवार को स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, भूमि व आर्थिक मदद देने का आश्वासन दे रहा है। फौरी तौर पर रेडक्रास सोसाइटी समिति से 25 हजार की चेक दिलाकर आर्थिक मदद की गई है।
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ढिकियापुर डेरा में स्वर्गीय अशोक नाथ की बेटियों सपना (17) व पूनम (16) की मौत ने हर किसी को झकझोरा है। दोनों घर की माली हालत ठीक न होने और क्षय रोग से पीड़ित मां नीलम का इलाज कराने के कारण काफी समय से संघर्ष भरी जिंदगी जी रही थीं। सोमवार को ट्रेन हादसे में उनकी मौत ने सरकारी व्यवस्था की हकीकत खोल दी। आर्थिक तंगी से परेशान होकर जिंदगी की जंग हारने वाली इन बेटियों ने जिले के अफसरों के साथ पात्र लाभार्थियों को मिलने वाली योजनाओं को कटघरे में खड़ा किया है। मंगलवार को डीएम प्रकाश चंद्र श्रीवास्तव, सीएमओ डॉ. अर्चना श्रीवास्तव, एसडीएम बिधूना लवगीत कौर समेत ब्लाक के अधिकारी गांव पहुंचे। अधिकारियों ने बीमार नीलम व उसके बच्चों गोपाल (12), राघव (8), शिवा (5), मानसी (9) व शिल्पा (6) को स्वास्थ्य, शिक्षा और तमाम योजनाओं का लाभ दिए जाने का भरोसा दिया। गांव में मौजूद सीएमओ से रेडक्रास सोसाइटी की तरफ से तत्काल 25 हजार का चेक दिलाया।
छह साल में चार बार किया आवास के लिए आवेदन
गांव पहुंचे अफसरों को नीलम व उसके परिजनों ने बताया कि पति अशोक की मौत के बाद उसने दो बार आवास के लिए आवेदन किया था। इससे पहले भी पति ने आवेदन किया था, पर आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका। जानकारी के मुताबिक डेरे में छह वर्ष के अंदर करीब 71 लोगों को आवास योजना का लाभ मिला है।
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वर्ष 2015 से आगरा में चल रहा इलाज
गांव पहुंची स्वास्थ्य टीम को नीलम ने बताया कि उसका इलाज आगरा के एक चिकित्सक के यहां चल रहा है। सीएमओ ने बताया कि पर्चे पर क्षय रोग से जुड़ी कई दवाइयां लिखी हैं। फिर भी उसकी जांच कराई जा रही है कि उसे टीबी है कि नहीं। पिछले माह घर-घर टीबी रोगी खोजने के लिए सर्वे किया गया। इसके बाद भी नीलम की बीमारी का पता नहीं लग सका।
नहीं मिल रही थी विधवा पेंशन
पति की मौत के बाद नीलम व उसके परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया था। इसके बाद भी उसे विधवा पेंशन का लाभ नहीं मिल रहा था। इसके लिए न तो ग्राम पंचायत स्तर पर और न किसी अधिकारी ने ऐसे परिवार को चिह्नित कर योजना का लाभ देना उचित समझा।
कागजी कार्रवाई पूरी करने में जुटे अफसर
ब्लाक और तहसील अधिकारियों से जिलाधिकारी प्रकाश चंद्र श्रीवास्तव ने ग्राम समाज की खाली जमीन को चिह्नित करने का निर्देश देकर पीड़ित परिवार को पट्टा दिए जाने का आश्वासन दिया है। अब लापरवाही छिपाने के लिए अधिकारी पीड़ित नीलम को विधवा पेंशन, आवास, पट्टा आदि दिलाने के लिए कागजी कार्रवाई पूरी करने में जुट गए हैं।

ढिकियापुर डेरा में पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे जिलाधिकारी प्रकाश चंद्र श्रीवास्तव। संवाद- फोटो : AURAIYA

पीड़ित नीलम।- फोटो : AURAIYA

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