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गर्मी के कारण चारा बना जहर, पशुपालकों में छाया संकट

Sat, 08 Aug 2015 01:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो औरैया
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गर्मी से जला चारा खाने से फूड प्वाइजिंग के चलते पशु बीमार होकर मर जाते हैं। इसके बचाव के लिए हरे चारे की सिंचाई करें। पशुओं को पर्याप्त पीने को पानी दें और उन्हें नहलाएं। पिछले दस दिनों से पानी न गिरने व तापमान में बेहद गर्मी से आम लोग परेशान हैं।
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वहीं पशुओं का हरा चारा भी मुरझाने लगा है। मुरझाने वाले चारे का सेवन करने से पशु बीमार हो रहे हैं। यह बातें पशु वैज्ञानिकों ने बताई।

 
क्षेत्र के नंदलाल पुर्वा निवासी पशुपालक अख्तियार सिंह पाल बताते हैं कि उनका मुख्य व्यवसाय पशुपालन है। वह चारा करके ही पशुओं का पेट भरते हैं। कहा कि मुरझाने वाले चारे को वह पशुओं को दूर रखते हैं, क्योंकि उस चारे का सेवन करने से पशु बीमार हो गए हैं, उनका इलाज चल रहा है।

 
वहीं जगदीश सिंह का कहना है कि तपन भरी गर्मी में वह पशुओं को चराने नहीं ले जाते हैं, क्योकि पशुओं के बीमार होने का डर बना रहता है। इस समय शिलमिली, लपा, दूव, मौथा, कनकौआ, जुनरी आदि चारे की किस्में पशुओं के लिए हानिकारक हैं।
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इस संबंध में जनता महाविद्यालय अजीतमल के पशु वैज्ञानिक प्रो. डा. बीएस भदौरिया बताते हैं कि मुरझाया हुआ चारा खाने से फूड प्वाइजनिंग हो जाता है। हाइड्रोटोनिक एसिड होने से बड़े जानवर बीमार हो जाते हैं। तथा उनके बच्चे मर जाते हैं।


इसलिए पशुपालक मुरझाने वाले चारे को पशुओं से दूर रखें। इसके बचाव बताते हुए उन्होंने कहा कि चारे वाली फसलों में सिंचाई करें या बारिश हो जाए, तभी इस संकट से बचा जा सकता है। इसके अलावा पशुओं को पीने के लिए पर्याप्त पानी दें।
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