काम, क्रोध, मोह, लोभ और अहंकार यह पांच विकार मनुष्य को पतन की ओर ले जाते हैं। इन पर विजय प्राप्ति के लिए हमें योगाभ्यास करना चाहिए, जिससे शरीर और मन को शांति मिलती है।
गुरुवार को नवीन नगर बाबरपुर स्थित ब्रहम कुमारी ईश्वरीय आश्रम में सत्संग के दौरान ब्रहम कुमारी चित्रा ने यह विचार व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि हम शरीर नहीं बल्कि आत्मा भी है। हमारे शरीर के सभी अंग आत्मा द्वारा संचालित है। आत्मा के निकलने पर यह शरीर किसी काम का नहीं है । इस आत्मा के जीवन का मुख्य उद्देश्य परमात्मा की प्राप्ति है, जो परम धाम वासी भगवान शिव ज्योति में अंतर्निहित है। इसके लिए हमें भगवान में ध्यान लगाना चाहिये।
कहा कि धन के बीच में फंसकर अहंकार का त्याग, संसारिक बातें सुनकर क्रोध का त्याग, घर गृहस्थी में रहकर मोह का त्याग, दूसरों को देखकर लोभ का त्याग तथा कलियुग में सुंदरता को देखकर काम का त्याग करना ही सच्ची तपस्या है ।
मनुष्य जीवन में सत्कर्र्म करते हुए लोभ मोह, काम, क्रोध, मद का त्याग करना ही सबसे बड़ी तपस्या है। इस तपस्या के लिए प्रत्येक मनुष्य को अपना जीवन लगा देना चाहिए। इस अवसर पर सैकड़ाें महिला पुरुष उपस्थित रहे।