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Auraiya News: सेनानी अहमक फफूंदवी का परिवार आज भी सम्मान और स्मारक का मोहताज

Fri, 14 Aug 2026 12:08 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
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अहमक फफूंदीवी का चित्र
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फफूंद। स्वतंत्रता सेनानी और शायर अहमद मुस्तफा खान उर्फ अहमक फफूंदवी को उनके योगदान के अनुरूप सम्मान नहीं मिला है। उनके परिजन स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार को मिलने वाले लाभों से वंचित हैं। करीब दो दशक से उनके नाम पर स्मारक बनवाने की मांग भी पूरी नहीं हो सकी है।
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अहमक फफूंदवी का परिवार स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा रहा है। उनके दादा इमाम खान फर्रुखाबाद के शमसाबाद निवासी क्रांतिकारी थे। 1857 की क्रांति में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आवाज उठाने पर अंग्रेजों ने उन्हें फांसी दे दी थी। इसके बाद उनके पुत्र अब्दुल्ला खान फफूंद के मोहल्ला महाजनान में आकर बस गए। 26 अप्रैल 1895 को अब्दुल्ला खान के पुत्र मुस्तफा खान का जन्म हुआ। उन्होंने दिल्ली में यूनानी चिकित्सा की शिक्षा ली और स्वतंत्रता आंदोलन को करीब से देखा। वर्ष 1921 में उन्होंने महात्मा गांधी और कांग्रेस के आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी शुरू की।

जेल में भी जारी रखा साहित्य सृजन

अहमक फफूंदवी अपनी शायरी और लेखनी से अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ प्रसिद्ध हुए। स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने के कारण उन्हें कई बार गिरफ्तार किया गया। उन्हें आगरा, लखनऊ और इटावा की जेलों में रखा गया था। जेल प्रवास के दौरान भी उन्होंने लेखनी को विराम नहीं दिया। उन्होंने जिंदाने-हिमाकत, संगो-खिश्त, नक्शो-हिकमत और जोशो-अमल जैसे काव्य संग्रहों की रचना की। स्वतंत्रता आंदोलन में अहम योगदान के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें प्रशस्ति पत्र, तमगे और ताम्रपत्र प्रदान किए थे।
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हिंदी-उर्दू शब्दकोश भी तैयार किया

अहमक फफूंदवी केवल स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि एक साहित्यकार भी थे। जीवन के अंतिम दौर में उन्होंने हिंदी-उर्दू शब्दकोश तैयार किया। उनकी इस महत्वपूर्ण साहित्यिक कृति को उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रकाशित भी किया था। 8 अगस्त 1957 को इस क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी और शायर का निधन हो गया। उन्हें फफूंद के चमनगंज तिराहे के पास तकिए वाली मस्जिद के कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

चार बेटों और बेटी का हो चुका निधन

अहमक फफूंदवी के चार बेटे और एक बेटी थीं। उनके पुत्रों में मुक्तदा खान जेलर, मुब्तदा खान होम्योपैथी चिकित्सक, मोहतदा खान प्रोफेसर और इस्तिफा खान पावर कारपोरेशन में इंजीनियर थे। उनकी बेटी का नाम माजिदा खातून था। परिवार के अनुसार, उनके सभी बच्चों का निधन हो चुका है। वर्तमान में उनके पौत्र खान मोहम्मद और आरिफ खान फफूंद के मोहल्ला महाजनान में परिवार की साहित्यिक विरासत संभाल रहे हैं।
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