श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र ब्रह्मलील बाबा परमहंस आश्रम में चल रहे धर्मानुष्ठान के तीसरे दिन श्रीमद् भागवत कथा में बाल व्यास छोटे ठाकुर महाराज ने परीक्षित कथा का श्रवण कराया।
भागवताचार्य ने श्रद्धालुओं से कहा कि मानव को विपरीत परिस्थितियों में भी घबराना नहीं चाहिए। कहा कि जब परीक्षित को श्राप लगा तो परीक्षित ने धैर्य नहीं छोड़ा। संतों की शरण में जाकर अपनी मुक्ति का उपाय पूछा और गंगा नदी के तट पर श्रीमद् भागवत कथा श्रवण करते हुए अपना जीवन गोविन्द को समर्पित कर दिया।
उन्होंने कहा कि भगवान की शरण में जाने से आनंद की अनुभूति होती है। उन्होंने भक्तों से अपनी हिन्दू संस्कृति की रक्षा करने के साथ माता पिता तथा गुरू का सम्मान करने की सीख दी।
कहा कि मनुष्य जैसा कर्म करेगा उसको कर्म के आधर पर ही फल प्राप्ति होगा। आयोजकों ने बताया कि ब्रह्मलीन बाबा परमहंस महाराज के सोलहवें वार्षिकोत्सव के तहत होने वाली श्रीमद् भागवत कथा का विश्राम तीन मई को होगा।
चार मई को बगिया मेें विशाल भंडारे का आयोजन है। आयोजकों ने नगर क्षेत्र के भक्तजनों से वार्षिक कार्यक्रम में पहुंचने की अपील की है।