गरीब बच्चों के लिए पुरानी किताबें और खिलौने जमा करने के लिए डीआईओएस कार्यालय की ओर से बनाए गए केंद्र अब तक सूने पड़े हैं। पिछले महीने से ब्लाकवार खोले गए जमा केंद्रों पर लोगों के न आने से डीएम और डीआईओएस कार्यालय का यह प्रयास असफल होता नजर आ रहा है। बुधवार को अमर उजाला ने सदर विकास खंड के नामित पुस्तक जमा केंद्र की पड़ताल की।
पुस्तक जमा केंद्र- तिलक इंटर कालेज
ब्लाक संबद्धता- औरैया विकास खंड
शहर के इटावा रोड पर संचालित तिलक इंटर कालेज को डीआईओएस कार्यालय ने शहर और ब्लाक क्षेत्र के लिए पुस्तक जमा केंद्र के रूप में नामित किया है। बुधवार सुबह 11:55 बजे इस केंद्र का जायजा लेने पर विद्यालय में प्रधानाचार्य आंजनेय सहाय अवस्थी व अन्य टीचर स्टाफ मौजूद मिला। प्रधानाचार्य से पुस्तक जमा केंद्र के विषय में पूछा तो उनकी ओर से ऐसे केंद्र के संबंध में जानकारी न होने की बात बताई गई।
उन्होंने विद्यालय में ऐसे किसी केंद्र के बारे में संज्ञान न होने की बात कही। पुष्टि के लिए प्रधानाचार्य विद्यालय में संचालित राजकीय जिला पुस्तकालय पहुंचे। लेकिन यहां भी ऐसे किसी पुस्तक जमा केंद्र के बारे में सूचना न होने की बात दोहराई गई। पुस्तक जमा केंद्र के लिखित आदेश के प्राप्त होने के सवाल पर प्रधानाचार्य ने इनकार किया। इन हालातों में सदर ब्लाक क्षेत्र के इस पुस्तक जमा केंद्र पर पुस्तक और खिलौने जमा कराए जाने की उम्मीद करना बेमानी नजर आई।
इन ब्लाकों पर भी हैं पुस्तक जमा केंद्र
औरैया - तिलक इंटर कालेज, औरैया
अजीतमल - जनता इंटर कालेज, अजीतमल
अछल्दा - आदर्श इंटर कालेज, अछल्दा
भाग्यनगर - राजकीय बालिका इंटर कालेज
दिबियापुर-सहार - जीजीआईसी, सहार
बिधूना - राजकीय बालिका इंटर कालेज
एरवाकटरा - राजकीय बालिका इंटर कालेज
फोन काल पर जमा सुविधा
जिले के दानवीरों से पाठ्य पुस्तकें , पुरानी कहानी की किताबें, खिलौने जमा कराने के लिए डीआईओएस ने 22 अप्रैल को आदेश किया था। पुस्तक जमा केंद्र पर जमा कराने के अलावा मोबाइल नंबर 9454457394 व 9453004165 फोन के जरिए दानवीरों को पुस्तकों और खिलौनों को जमा कराने की सहूलियत प्रदान की है। इसे ढिलाई कहें अथवा प्रचार-प्रसार का अभाव कि 20 दिन बाद भी पुस्तक जमा केंद्रों खाली दिखाई दे रहे हैं।
पुस्तक जमा केंद्र नामित किए जाने के साथ ही संबंधित विद्यालयों को इस आशय के निर्देश जारी कर दिए गए थे। विद्यालयों में बच्चों की कम उपस्थिति हो रही है। इस कारण से पुस्तकें जमा कराने की प्रगति थमी है।
चंद्र प्रताप सिंह, डीआईओएस