नौ नवंबर 2014 को लाल किला दिल्ली से शुरू हुई आचार्य श्री महाश्रमण की तेरापंथी अहिंसा यात्रा का शनिवार को शहर आगमन पर भव्य स्वागत किया गया।
इस मौके पर तेरापंथ के ग्यारहवें अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण ने मूक भाषा और प्रचार सामग्री के माध्यम से नशा मुक्त समाज, ईमानदारी से मानव के साथ सद्भावना पूर्ण व्यवहार करने का संदेश दिया।
तीन देश और 12 राज्यों की सीमा से होकर 10000 किमी अहिंसा पद यात्रा ने शनिवार की सुबह तकरीबन 11 बजे शहर में प्रवेश किया। यात्रा का जगह-जगह स्वागत किया गया। सुभाष चौराहे पर पहुंची तेरापंथी अहिंसा यात्रा का चेयरमैन प्रतिनिधि लालजी शुक्ला ने स्वागत किया।
इस मौके पर श्री महाश्रमण महाराज ने अपने प्रचार-प्रसार सामग्री के माध्यम से बताया कि अहिंसा यात्रा का उद्देश्य समाज में सद्भावना का संप्रसार, नैतिकता का प्रचार प्रसार और नशा मुक्ति के लिए प्रचार-प्रचार के जरिए लोगों को जागरूक करना है।
अहिंसा यात्रा के बारे में जानकारी देते हुए यात्रा में शामिल तेरापंथी अनुयाइयों ने बताया कि आचार्य श्री महा श्रमण की अगुवाई में लाल किला दिल्ली से गत नौ नवंबर 2014 से अहिंसा यात्रा शुरू की गई है।
यह पदयात्रा भारत नेपाल व भूटान तीन देशों के 12 राज्यों से होती हुई 10000 किमी का सफर तय करेगी। यात्रा के दौरान जन मानस को यथा संभव ईमानदारी का अनुपालन, नशामुक्त जीवन व मानव के साथ सदभाव पूर्ण व्यवहार करने का संदेश दिया जा रहा है।