फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Auraiya News: तहसील ने कबूली गलती, एक नाम के दो व्यक्ति होने से चूक

Mon, 02 Jun 2025 11:45 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
विज्ञापन
विज्ञापन
औरैया। सहायल गांव में जीवित बुजुर्ग लाखन को कागजों में मृत दिखाकर दूसरे के नाम चढ़ाई गई वरासत के मामले में बिधूना तहसील प्रशासन ने अपनी गलती मानी है।
विज्ञापन

कहा है कि गांव में एक नाम के दो व्यक्ति होने से ये चूक हुई है। वहीं, इस जमीन के क्रय विक्रय पर रोक लगा दी गई है। अधिकारियों के अनुसार कोर्ट में दायर वाद की सुनवाई कर राजस्व अभिलेखों में इसे दुरुस्त करा दिया जाएगा।
बिधूना तहसील के सहायल गांव के निवासी लाखन (85) के नाम गाटा संख्या 1108 रकबा 0.494 हेक्टेअर जमीन है। इस जमीन पर खेती बाड़ी करते हैं।
क्षेत्रीय लेखपाल व कानूनगो ने राजस्व दरस्तावेजों में जीवित लाखन को मृत दिखाकर उनके नाम की जमीन प्रदीप कुमार, संदीप कुमार व रामदुलारी के नाम फर्जी तरीके से दर्ज कर दी। मामले में पीड़ित बुजुर्ग ने 30 मई को डीएम से शिकायत की थी।
विज्ञापन

इस मामले में डीएम डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने जांच के आदेश भी दिए थे। फौरीतौर पर जांच में बिधूना तहसीलदार जितेश वर्मा ने चूक को स्वीकारा। कहा कि गांव में लाखन नाम के दो व्यक्ति होने से ये गलती हुई है।
जिंदा लाखन की जमीन मृत लाखन सिंह की पत्नी रामदुलारी व उनके बेटों प्रदीप कुमार, संदीप कुमार के नाम चढ़ (वरासत) गई है। मामला संज्ञान में आने के बाद न्यायालय में वाद दायर कर लिया गया है। साथ ही इस जमीन की खरीद फरोख्त पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसे सही करने में एक माह का समय लगेगा। उसके बाद जमीन संबंधित के नाम खतौनी में दर्ज हो जाएगी।

बम्हौरी में लेखपाल निलंबित पर रिपोर्ट दर्ज नहीं
सदर तहसील की ग्राम पंचायत शेरपुर सरैया के मजरा बम्हौरी निवासी प्रेमा देवी (85) के पति रामनारायन की 25 साल पहले मौत हो गई थी। इसके बाद उनकी जमीन प्रेमा देवी व उनके पुत्र शिशुपाल व शिवपाल के नाम आ गई थी। प्रेमा देवी ने आरोप है कि बीते अप्रैल माह में बेटे शिवपाल ने उनका फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कराया।
शिवपाल ने रिश्ते में उसके भतीजे क्षेत्रीय लेखपाल आलोक पाल के जरिए मृत्यु प्रमाण पत्र दिखाते हुए जमीन की वरासत अपने और भाई के नाम करवा दी। छह मई को शिवपाल ने अपने हिस्से में आई 34 डिसमिल जमीन बेच भी दी थी। अमर उजाला ने 19 मई के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
इस फर्जीवाड़े का संज्ञान लेते हुए डीएम डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने जांच बैठाई थी। एसडीएम की जांच रिपोर्ट पर लेखपाल आलोक पाल निलंबित कर दिए गए थे। वहीं इस फर्जीवाड़े से जुड़े लोगों के खिलाफ सदर कोतवाली में तहरीर देने की बात भी कही गई थी, लेकिन अबतक मामले में रिपोर्ट दर्ज नहीं हो सकी। मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। (संवाद)
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें