फफूंद। सुप्रीम कोर्ट की ओर से पूर्व में नियुक्त सभी शिक्षकों को शिक्षक अर्हता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य के फैसले का यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन ने विरोध जताया। इस मसले को लेकर मंगलवार को शिक्षकों ने जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। बाद में पीएम को संबोधित ज्ञापन डीएम को दिया और नियमों के बदलाव की मांग रखी।
एसोसिएशन के जिला महामंत्री विनय वर्मा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से 25 से 30 वर्ष पूर्व नियुक्त शिक्षकों का भविष्य संकट में है। शिक्षक अवसादग्रस्त हैं कि वह अब दो साल में कैसे परीक्षा की तैयारी करें। बताया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 में अधिनियम लागू होने की तिथि 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी उत्तीर्ण करने के निर्देश नहीं हैं। 2107 के पारित आरटीई संशोधित अधिनियम में एक मार्च 2015 को नियुक्त या कार्यरत शिक्षकों को टीईटी चार वर्ष में करना अनिवार्य है जबकि सुप्रीम कोर्ट के एक सितंबर 2025 के निर्देश के तहत सभी शिक्षकों को टीईटी अनिवार्य है।
टीईटी पास न करने वाले शिक्षकों की दो वर्ष में सेवा समाप्त करने को कहा गया है। उन्होंने केंद्र सरकार से संशोधित अधिनियम जारी करने व सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करने की मांग की है। ज्ञापन देने वालों में आशीष त्रिपाठी, धर्मेंद्र आंबेडकर, वरुण कुमार, प्रिंस पोरवाल, शिवप्रताप सिंह, बलवीर सिंह, रिज़वान, अभिषेक, अवनीश शाक्य, भरत यादव, प्रदीप राजपूत, लक्षयदीप व राघवराम आदि शिक्षक मौजूद रहे। (संवाद)