जीवन में सुख-शांति के लिए कोई शार्टकट नहीं हैं। सफलता और शांति का मार्ग भगवान की शरण से होकर जाता है। जीवन में कुछ समय धार्मिक कार्यों में अवश्य दें। इससे मन की शांति मिलती है। कंचौसी रेलवे स्टेशन पार्क में चल रही भागवतकथा के पांचवे दिन रविवार को आचार्य ऋषभदेव पांडेय ने भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की लीला सुन श्रोता खुशी से झूम उठे। उन्होंने भक्तों को बताया कि भगवान का जन्म नहीं अवतार होता है।
वह दुष्टों के विनाश के लिए आते हैं। भगवान अपने भक्त को कभी कष्ट में नहीं देख सकते हैं। इसलिए भक्त को भगवान की उपासना भी सच्चे मन से करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता और शांति का कोई शार्टकट नहीं होता है। सीधे रास्ते पर चलने से सुख-शांति मिलती है। शार्टकट मार्ग पर चलने वाला कुछ पल के लिए खुशहाल हो सकता है, लेकिन उसे स्थायी शांति नहीं मिलेगी। हम सभी को स्थाई शांति खोजने के लिए प्रयास करना होगा। कथा श्रवण के दौरान सैकड़ों की संख्या में भक्तगण मौजूद रहे।