संवाद न्यूज एजेंसी
औरैया। जिले में टीबी रोगियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। यह हम नहीं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कह रहे हैं। टीबी रोगियों को दी जाने वाली दवा का स्टाॅक महज 10 दिन के लिए शेष बचा है। ऐसे में शासन स्तर से दवा की सप्लाई देने को लेकर हुए टेंडर व गेल से मिलने वाली दवाओं की खेप पर स्वास्थ्य महकमे की आस टिकी हैं।
स्वास्थ्य महकमे की ओर से चिह्नित जिले में कुल 1480 टीबी के मरीज हैं। जिन्हें नियमित दवा का सेवन ही इस बीमारी से बचा सकता है। एक भी दिन दवा का क्रम टूटने पर दोबारा से निर्धारित दवा का कोर्स कराया जाता है। प्रारंभिक टीबी की थ्री-एफडीसी व फोर एफडीसी दवा के नियमित सेवन से मरीजों के स्वास्थ्य को ठीक किया जाता है।
जिला क्षय रोग विभाग में दवाओं के स्टॉक पर बात की जाएं तो जिले के मरीजों के मुकाबले महज 10 दिन की दवा बची है। ऐसे में जिले में 1500 के करीब मरीजों की दवाओं में विलंब हो सकता है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने भी टीबी दवा के स्टॉक को लेकर चिंता व्यक्त की है। क्षय रोगियों की मदद के लिए अक्सर आगे आने वाले गेल से भी संपर्क किया जा रहा है। वहीं शासन स्तर से चल रही टेंडर प्रक्रिया पर भी अधिकारियों की आस टिकी है। दवा की कमी से निपटने की राह स्वास्थ्य विभाग के लिए फिलहाल आसान नजर नहीं आ रही है।
एक दिन भी दवा का सेवन न करने पर दोबारा शुरू हो जाता है कोर्स
क्षय रोगियों को बीमारी से उबारने के लिए दो तरह की दवाएं दी जाती है। प्राथमिक चरण आसान होता है। वहीं दवा खाने में विलंब होने पर एक सिरे से दोबारा से दवा सेवन का काेर्स कराया जाता है। यदि जिले में टीबी रोगियों को दी जाने वाली दवा का टोटा होता है तो इन मरीजों को प्राइवेट दुकानों से दवा लेनी होगी। समय से न खरीद पाने व इंतजाम न होने पर दवा के सेवन में विलंब भी हो सकता है। ऐसे में क्रिटिकल मामलों में दिक्कत हो सकती है।
वर्जन
क्षय रोगियों को दी जाने वाली दवाओं का स्टाॅक महज 10-15 दिन के लिए शेष बचा है। शासन स्तर से दवाओं को लेकर टेंडर प्रक्रिया चल रही है। गेल से भी सहयोग मिल जाता है। पूरा प्रयास है कि दवा की उपलब्धता किसी तरह से प्रभावित न हो।
-संतकुमार, जिला क्षय रोग अधिकारी