बारिश ने एक बार फिर किसानों की चेहरों पर मायूसी ला दी। तेज हवा और बारिश से खेतों में धान, बाजरा और तिली की फसल बर्बाद हो गई। फसलों की हालत देख बढ़ी ठंड में किसानों के माथे पर पसीना आ रहा है। वहीं कृषि विभाग ने बुधवार की बारिश में चार से पांच फीसदी फसलों का नुकसान होने का आंकलन किया है।
समय पर कम मानसूनी बारिश से खरीफ सीजन के किसानों की 60 से 70 फीसदी तक धान, बाजरा और तिली की फसलें बर्बादी के कगार पर पहुंच गईं थी।मंगलवार को दो राउंड की बारिश के बाद बुधवार की सुबह आंधी के बाद तेज हवा से किसानों के अरमान धुल कर रह गए हैं।
बारिश ने खेतों में खड़ी पकी-अधपकी धान, बाजरा और तिली की फसल को बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। बारिश से बीहड़ी क्षेत्र के यमुना किनारे बसे गांवों में तिली की फसल शतप्रतिशत प्रभावित हुई है। गांव के किसान मनोज कुमार, रामजी लाल, होरीलाल, सुशीला देवी आदि का कहना था कि दो दिनों की बेमौसम बारिश से उनकी धान की 65 फीसदी फसल भीगकर बर्बाद हो गई है।
वहीं बारिश ने मधूपुर गांव के श्याम सिंह, केसरी देवी, देवीलाल आदि किसानों की बाजरा पकी फसल भग गई है। इसका असर फसल की कटाई में दाने गुणवत्ता खराब करेगी। मंगलवार और बुधवार को हुई बारिश से कृषि विभाग ने बाजरा में तीन से पांच फीसदी वहीं धान की फसल में भी पांच फीसदी तक का नुकसान होने का अनुमान लगाया है।
डीडी कृषि डा. बनारसी यादव ने बताया कि बारिश से धान, बाजरा, तिली, आलू और अरहर की फसल को प्रभावित हुई हैं। खेतों पर गिरी धान की फसल को किसान तुरंत काट लें। पकी बाजरा की भीगी फसल को किसान सुखाकर अपनी फसल को बचा सकते हैं।
आलू किसानों को चेतावनी
औरैया। दो दिनों की बारिश ने आलू और अरहर की फसल को भी प्रभावित किया है। कृषि विभाग ने खेतों में नमी को देखते हुए आलू किसानों को आलू की बोआई अगले दो दिनों रोक देने की सलाह दी है। वहीं अरहर की फसल वाले में खेतों में और बेलदार सब्जियों की फसलों में जमा पानी को निकाल देने की कृषि विभाग ने चेतावनी दी है।