यदि आप सामान्य किसान हैं और आपको यूरिया चाहिए तो आपको एक अनचाहा प्रोडक्ट खरीदना होगा। अन्यथा यूरिया के लिए यूं ही धक्के खाते रहिए।
साधन सहकारी समितियों, सहकारी संघों और एजेंसियों पर यूरिया के लिए आने वाले किसानों के साथ यही बर्ताव कर उनके जेब पर डाका डाला जा रहा है। अनचाहा प्रोडक्ट न लेने वाले किसानों को समितियों से लौटाया जा रहा है।
रबी सीजन की बुवाई करीब-करीब समाप्त करने के बाद किसान अब गेहूं के लिए किसान यूरिया मांग रहे हैं। यूरिया खाद के लिए इन दिनों किसान साधन सहकारी समितियों, सहकारी संघों, क्रय विक्रय समितियों और क्रय एजेंसियों पर टूट रहा है। किसानों की मजबूरी का लाभ यूरिया विक्रय प्रभारी उठा रहे हैं।
मांग के सापेक्ष कम उपलब्धता देखते हुए किसानों को समितियों से जोत बही आदि कागजात दिखाने पर यूरिया के अधिकतम दो पैकेट दिए जा रहे हैं। यह भी तब जब सचिवों और सहायकों द्वारा थोपे जा रहे अनचाहे प्रोडक्ट के रूप में एनपीके 1818 का एक किलो पाउडर खरीदें।
खास बात यह है कि समितियों से दिए जा रहे उक्त अनचाहे प्रोडक्ट पर अंकित मूल्य 68 रुपये के सापेक्ष न केवल 70 रुपये वसूले जा रहे हैं बल्कि उन्हें अगस्त 2013 के उत्पादन तिथि का प्रोडक्ट दिया जा रहा है। उक्त पैकेट पर एक्सपाइरी तिथि तक अंकित नहीं है।