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सहनगर व पाता में छाया मातम, नहीं जले चूल्हे

Wed, 08 Jul 2015 12:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, औरैया
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बेकाबू ट्रक से कुचलकर हुई चार लोगों की मौतों का मातम मंगलवार दूसरे दिन भी पाता और सहनगर में छाया रहा। सैकड़ों लोग आहत परिवार को ढांढस बंधाते नजर आए। गम और मातम के बीच पाता गांव के घरों में चूल्हे तक नहीं जले। दोपहर बाद तक परिजन शवों के गांव पहुंचने का इंतजार करते रहे।
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मंगलवार सुबह से पाता और सहनगर में आहत परिवारों के घर ढांढस बंधाने वालों की भीड़ लगी रही। सहनगर में मृतक शिव कुमार उर्फ शिवनरेश की पत्नी अनीता बदहवास रोती बिलखती रही।


मां के पास बैठे बच्चे रेनू (12 वर्ष) और ज्ञानी (08 वर्ष) मां के चेहरे को देख फफकता रहा। महिलाओं ने अनीता को सहारा देते हुए ज्ञानी को उसकी गोद से उठाया और उसे दुलारते नजर आए।
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ऐसा ही नजारा पाता गांव में मृतक उपदेश के परिवार में देखने को मिला। पिता बहादुर सिंह घर से बाहर बैठे फूट- फूटकर रोते रहे। पुत्र के खोने का गम उनकी आंखों से टपकते आंसुओं में साफ झलक रहा था। गांव की महिलाएं भी दुख की इस घड़ी में सभी को दिलासा देती दिखाई पड़ी।


 
बहादुर सिंह के पड़ोस में उसके भाई रघुराज सिंह के घर में कोहराम मचा हुआ था। दीवार से सिर पटक रही महिला को सभी बचाने के लिए दौड़ पड़े। मुसीबत के इन क्षणों को देख घर के बाहर खड़े लोगों की आंखें भी नम दिखाई दी।
पड़ोसी शिवम पुत्र अरविंद के घर में सन्नाटा पसरा था। सभी घर के बरामदे में खामोश बैठे थे।


पाता गांव में गम में डूबे पीड़ित परिवारों के घरों में सोमवार सुबह से चूल्हा तक नहीं जला। भूख प्यास से परेशान बच्चों को पड़ोसियों ने घर ले जाकर खाना खिलाया।




काश अभी दो दिन और न जाता...- औरैया। जवान पुत्र उपदेश की मौत से टूट चुके बहादुर सिंह फूट- फूटकर रोते दिखाई दिए। पिता की आंखों से टपक रहा दर्द सिसकियां बनकर फूटता दिखाई दे रहा है।


बहादुर सिंह बार-बार यही कह रहे थे काश दो दिन अभी और कालेज न जाता तो जान बच जाती। इस दौरान वहां मौजूद सुरेश ने बताया कि शनिवार से लड़कों ने कालेज जाना शुरू किया था। रविवार को छुट्टी थी और सोमवार को हादसा हो गया।



मौत ने बना दिया था सभी को साथी...- औरैया। कहते हैं कि जब मौत आती है तो अच्छा रास्ता भी बुरा हो जाता है। ऐसा ही कुछ उपदेश और भाई कौशलेंद्र व दोस्त शिवम के साथ हुआ।


कालेज खुलने के दो दिन तक दोनों अलग-अलग कालेज से लौटे थे, लेकिन तीसरे दिन तीनों की किस्मत में मौत थी, जिसने उन्हें साथ चलने के लिए विवश कर दिया था।


कालेज के निकट मौजूद विनय कुमार, अमित आदि ने बताया कि कालेज के बाहर उपदेश बाइक के पास खड़ा था. पहले उपदेश बाइक लेकर चल दिया। कुछ दूर जाने के बाद उसने बाइक वापस मोड़ दी और कालेज गेट के पास आ गया। तभी कुछ देर बाद कालेज से दो लड़के और निकले।


दोनों लड़के 15 मिनट तक गेट के नजदीक बातें करते रहे। इसके बाद तीनों एक बाइक में सवार हो गए और चल दिए। कुछ देर बाद पता चला कि बाइक सवारों को ट्रक ने कुचल दिया है।



बंद रहा बाजार, गलियों में सन्नाटा- औरैया। पाता क्षेत्र में तीन छात्रों समेत चार लोगों की मौत पर शोक में पाता बाजार बंद रहा। दुकानों के शटर गिरे रहे। गलियों में सन्नाटा छाया रहा है। सभी घटना को लेकर आक्रोशित नजर आए।


सोमवार को पाता मोड़ के नजदीक हुए हादसे का असर सोमवार देर रात सड़कों पर फिर दिखाई दिया। पीड़ित परिजन शव लेकर सड़कों पर उतर आए, ग्रामीणों ने हंगामा करना शुरू कर दिया।


रात में ग्रामीणों का हंगामा होता देख पुलिस प्रशासन सकते में आ गया, लेकिन पुलिस और सीआईएसएफ के जवानों ने ग्रामीणों को  समझा बुझाकर स्थिति को काबू में किया। इसका असर मंगलवार को साफ दिखाई दिया। बाजार व दुकानों के शटर गिरे रहे। पाता व सहनगर की गलियों में सन्नाटा पसरा रहा।


लोगों ने वाहनों की रफ्तार पर रोक लगाने की स्पीड ब्रेकर बनाए जाने की मांग की है। वहीं गांवों में हादसे को लेकर सभी दहशतजदा है। मंगलवार की सुबह से पाता व सहनगर में जानवरों के खुरों और जंजीरों की आवाजें ही सुनाई देती रहीं।
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