सुबह के समय कोचिंग पढ़कर लौटती छात्राएं।
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सर्दी का सितम रविवार को भी जारी रहा। 24 घंटों के दौरान सर्दी से किसान समेत चार की मौत हो गई। रात का पारा एक डिग्री बढ़कर पांच पर पहुंच गया। वहीं, दिन में धूप निकलने से लोगों के चेहरे खिल उठे। बुजुर्गों ने जहां धूप में बैठकर राहत की सांस ली, वहीं बच्चों ने खेलकूूद कर मजे किए।
ककोर क्षेत्र के आजादपुर गांव निवासी शिवपाल (48) की गांव में एक बीघा खेती है। जिसमें उसने गेहूं की फसल बोई थी। क्षेत्र में अन्ना जानवरों के आतंक के चलते किसानों पर फसल बचाने का संकट है। शिवपाल भी रोज सर्द रातों में खेत पर रुककर फसल की रखवाली करता है। शनिवार रात खेतों की रखवाली करते समय सर्दी लगने से अचानक उसके सीने में होने लगा। रात करीब 12 बजे वह दर्द परेशान से होकर घर चला आया, जहां उसे उल्टियां शुरू हो गईं। थोड़ी देर में ही किसान ने दम तोड़ दिया। उसके चार लड़के और चार लड़कियां हैं।
वहीं, शहर के मोहल्ला तिलक नगर निवासी कमलेश कुमारी (65) पत्नी अरविंद कुमार पांडेय रविवार की सुबह घर में बैठी हुई थी। तभी सर्दी के कारण वह बेहोश होकर जमीन पर गिर गई। परिजन वृद्धा को जिला अस्पताल लाए, यहां पर डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
उधर, नगर पंचायत बाबरपुर अजीतमल के मोहल्ला आजाद नगर (गढ़ा) निवासी मनोज कुमार का सोलह वर्षीय पुत्र विकास जनता इंटर कालेज अजीतमल में कक्षा दस का छात्र था। शनिवार देर शाम तक वह गांव के बच्चों के साथ बाहर खेलता रहा। घर आने पर वह कांपने लगा। परिजनों ने रजाई ओढ़ा दी। आराम मिलने पर खाना खिलाकर सुला दिया। सुबह परिजनों ने देखा तो उसकी मौत हो चुकी थी। विकास की मौत से घर में कोहराम मच गया। इस संबंध में एसडीएम विजय प्रताप सिंह ने बताया कि लेखपाल को मौके पर भेजा गया है। जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
दिबियापुर: ग्राम खजुवैया में रविवार की सुबह लगभग साढ़े चार बजे अंशू यादव के तीन महीने के पुत्र राजा की हालत बिगड़ गई। परिजन उसे दिबियापुर सीएचसी ले गए। यहां चिकित्सकों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। परिजनों का कहना है कि शनिवार की दोपहर में बच्चे को टीका लगा था। टीका लगने के बाद बुखार की आशंका के चलते दवा भी दी गई थी। टीका लगने के बाद ही हालत बिगड़ गई। रविवार की सुबह बच्चे ने दम तोड़ दिया। सीएचसी दिबियापुर के अधीक्षक डा. जितेंद्र यादव ने बताया कि बच्चे को न्यूमोनिया हुआ था। परिजन समझ नहीं पाए और बच्चे की मौत हो गई। बताया कि बच्चे के सीने पर चकत्ते पड़े थे। क्योंकि गांव में 10 अन्य बच्चों को टीकाकरण किया गया। वह सभी बच्चे ठीक हैं। इसलिए टीकाकरण से बच्चे की न तो हालत बिगड़ सकती और न ही मौत हो सकती है।