स्कूली बस, जिस पर नहीं लिखा है कि इसमें बच्चे हैं।
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एटा में बच्चों के साथ हादसे के बाद परिवहन विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों की नींद टूटी है। शुक्रवार को एआरटीओ ने स्कूली वाहनों की सड़क पर चेकिंग की। स्कूलों में भी वाहन चेकिंग अभियान चला। आधे से अधिक वाहन फिटनेस के अनुरूप नहीं पाए गए। सख्ती से चले अभियान के कारण कई स्कूल संचालकों ने अपने वाहनों को गोपनीय स्थानों पर खड़ा करा दिया था।
शुक्रवार की सुबह एआरटीओ मनोज कुमार ने दिबियापुर तिराहे पर स्कूली वाहनों को चेक करना शुरू किया। तभी डीएम के बालाजी ने उन्हें निर्देशित किया कि स्कूलों में जाकर वाहनों की फिटनेस चेक करें।
स्कूलों में वाहन चेकिंग अभियान शुरू होते ही संचालकों में हड़कंप मच गया। संचालकों ने कंडम वाहनों को आनन-फानन में स्कूल से हटवाया। एआरटीओ ने ज्ञान स्थली, सेंट फ्रांसेस स्कूलों में वाहनों को चेक किया। चालकों के लाइसेंस के साथ-साथ गाड़ी की फिटनेस, गाड़ी की स्थिति,बच्चों के बैठने की सीटें, शीशे चेक किए गए। एआरटीओ ने बताया कि चेकिंग के दौरान पांच वाहनों को सीज किया गया। इनमें दो बसें और तीन मैजिक व वैन हैं। इनकी फिटनेस समाप्त हो चुकी थी। इसके बाद भी इनसे बच्चे ले जाए जा रहे थे।
उन्होंने बताया कि 15 वाहनों का चालन किया गया। तीन वाहनों की फिटनेस निरस्त की गई। यह वाहन सड़क पर चलने लायक नहीं थे। इन्हें संचालक जबरन चला रहे थे। एआरटीओ ने बताया कि वाहन चेकिंग अभियान सख्ती से सभी कस्बों में चलाया जाएगा।